1320 MW कोयला‑आधारित बिजली खरीद को लेकर राजनीतिक टकराव में नई बारी, भाजपा नेता ने पवन खेड़ा के खिलाफ दायर की शिकायत

उत्तराखंड में 1320 मेगावाट कोयला‑आधारित बिजली की दीर्घकालिक खरीद को लेकर सियासी माहौल गरम हो गया है। कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर टेंडर की शर्तों में बड़े पैमाने पर बदलाव करके एक निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया था। इस आरोप को भ्रामक ठहराते हुए, भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद के उपाध्यक्ष भूपेश उपाध्याय ने बागेश्वर में औपचारिक शिकायत दर्ज कर पवन खेड़ा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।

भूपेश उपाध्याय ने अपनी शिकायत में कहा कि टेंडर की 86 शर्तों में से 84 में बदलाव केवल तकनीकी जरूरत, परियोजना के स्थान, ईंधन की उपलब्धता और परिवहन लागत को ध्यान में रखकर किए गए थे। उन्होंने यह भी उजागर किया कि इस 1320 MW बिजली खरीद की प्रक्रिया राज्य की भविष्य की विद्युत मांग को पूरा करने के उद्देश्य से, प्रतिस्पर्धी निविदा और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (ऊर्जा नियामक) की मंजूरी के तहत आगे बढ़ी है। उपाध्याय ने संलग्न वीडियो, फेसबुक पोस्ट के स्क्रीनशॉट और संबंधित दस्तावेजों के साथ यह तर्क दिया कि पवन खेड़ा के आरोपों का उद्देश्य मुख्यमंत्री धामी की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना है, खासकर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले।

उपाध्याय ने यह भी कहा कि टेंडर फरवरी 2025 में जारी हुआ था, जबकि इस मुद्दे को अब राजनीतिक रूप से उठाया जा रहा है। उन्होंने बागेश्वर के प्राधिकरणों से अनुरोध किया कि पवन खेड़ा के खिलाफ झूठे आरोप लगाने और मुख्यमंत्री की छवि को बदनाम करने के लिए सुसंगत धाराओं में अभियोग दर्ज किया जाए। उत्तराखंड सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव आर. मीना कुशि सुंदरम को कहा कि सभी प्रक्रियाएँ निर्धारित नियम, तकनीकी आवश्यकताओं और नियामक की स्वीकृति के अनुसार ही संचालित हुई हैं।

इस विवाद ने राज्य की ऊर्जा नीति और सियासी रणनीतियों को फिर से सवालों के घेरे में डाल दिया है। जबकि कांग्रेस इस मुद्दे को सरकारी निर्णयों की पारदर्शिता पर प्रकाश डालने के लिए उठा रही है, भाजपा इसको चुनावी राजनीति का उपकरण मानते हुए पवन खेड़ा के खिलाफ कठोर कदम उठाने का इशारा कर रही है। आगामी दिनों में इस मामले की कानूनी प्रगति और नियामक की प्रतिक्रिया देखी जाएगी।

Original Title: 1320 MW बिजली खरीद विवाद: धामी के खिलाफ आरोपों पर भूपेश उपाध्याय ने दी तहरीर, पवन खेड़ा पर कार्रवाई की मांग

Original Content: Political Allegations | Power Tender | Bageshwar | Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीद को लेकर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर टेंडर की शर्तों में बदलाव कर एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए जाने के बाद अब भाजपा नेता और उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद के उपाध्यक्ष भूपेश उपाध्याय ने बागेश्वर में शिकायत दी है। उन्होंने पवन खेड़ा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
भूपेश उपाध्याय ने अपनी शिकायत में पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों को असत्य और भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि इन आरोपों के जरिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सार्वजनिक और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
दरअसल 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली की दीर्घकालिक खरीद को लेकर कांग्रेस ने उत्तराखंड सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि टेंडर की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव किए गए और इससे अदाणी पावर को फायदा पहुंचाने की स्थिति बनी। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया है कि पहले सरकारी उपक्रमों के जरिए परियोजना की योजना पर विचार क्यों किया गया और बाद में निजी कंपनी से बिजली खरीद का रास्ता क्यों अपनाया गया।
भूपेश उपाध्याय ने अपनी शिकायत में कहा कि 1320 मेगावाट बिजली खरीद की प्रक्रिया राज्य की आने वाली बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि टेंडर प्रक्रिया प्रतिस्पर्धी निविदा और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की मंजूरी के तहत आगे बढ़ी है।
उत्तराखंड सरकार की ओर से भी इन आरोपों को खारिज किया गया है। ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा है कि बिजली खरीद की प्रक्रिया निर्धारित नियमों, तकनीकी जरूरतों, प्रतिस्पर्धी बोली और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की मंजूरी के अनुसार की जा रही है। उनके मुताबिक टेंडर की शर्तों में बदलाव तकनीकी जरूरत, परियोजना की लोकेशन, ईंधन की उपलब्धता और परिवहन लागत जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर किए गए।
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के रिकॉर्ड में भी 1320 मेगावाट आरटीसी कोयला आधारित बिजली की दीर्घकालिक खरीद से संबंधित आवेदन और निविदा की कुछ शर्तों में संशोधन से जुड़े मामले दर्ज हैं।
भूपेश उपाध्याय ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठा रही है। उन्होंने पवन खेड़ा पर मुख्यमंत्री की छवि खराब करने के उद्देश्य से आरोप लगाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने यह भी कहा कि 1320 मेगावाट बिजली खरीद का टेंडर फरवरी 2025 में जारी हुआ था…जबकि इस मुद्दे को अब राजनीतिक तौर पर उठाया जा रहा है।
भूपेश उपाध्याय ने बागेश्वर के संबंधित अधिकारी से पवन खेड़ा के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर कथित तौर पर झूठे आरोप लगाने और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के मामले में सुसंगत धाराओं में अभियोग दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत के साथ संबंधित वीडियो, फेसबुक पोस्ट के स्क्रीनशॉट और 1320 मेगावाट बिजली निविदा से जुड़े उपलब्ध दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं।