उत्तराखंड की राजनीति में नया सन्देश: सर्वे में भाजपा के लिए 54 सीटों का बंपर अनुमान, हर आयु वर्ग में धामी पर भरोसा

उत्तराखंड की राजनीतिक पटरी पर 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर एक नया और चौंकाने वाला सन्देश उभरकर सामने आया है। हाल ही में एक प्रमुख मीडिया संस्थान द्वारा कराए गए विस्तृत सर्वे के आंकड़ों ने प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। सर्वे के प्रारंभिक परिणामों के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अगले चुनाव में 70 सदस्यीय विधानसभा में 54 सीटें जीतने की मजबूत संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। हालांकि, पत्रकारिता की दृष्टि से यह आंकड़े केवल मौजूदा जनमत का एक संकेतक हैं और वास्तविक चुनावी परिणाम नहीं हैं, फिर भी ये आँकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि धामी सरकार की नीतियों ने मतदाताओं के बीच गहराई से जगह बना ली है।

सर्वे ने मुख्यमंत्री धामी के प्रशासनिक और सामाजिक फैसलों के प्रति जनता के समर्थन का एक स्पष्ट चित्र प्रस्तुत किया है। विशेष रूप से, महिलाओं को विधानसभा में आरक्षण देने के विषय पर धामी सरकार के फैसले ने 88 प्रतिशत मतदाताओं का पूर्ण समर्थन जीता, जबकि केवल 5 प्रतिशत ने इसका विरोध किया। इसी तरह, देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और मूल स्वरूप को बनाए रखने की दिशा में किए गए प्रयासों को 70 प्रतिशत लोगों ने पूर्णतः स्वीकार किया है। समान नागरिक संहिता (UCC), नकल विरोधी कानून और विकास व सुशासन से जुड़ी अन्य नीतियों ने भी मुख्यमंत्री की स्वीकार्यता को और मजबूत किया है।

आयु वर्ग के आधार पर किए गए विश्लेषण में एक दिलचस्प लेन-देन (trend) सामने आया है। सर्वे के मुताबिक, 18 से 25 वर्ष के युवाओं में समर्थन 37.8 प्रतिशत था, जो 26-35 वर्ष के वर्ग में 43 प्रतिशत, 36-50 वर्ष में 46.8 प्रतिशत, 51-60 वर्ष में 50.3 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 51.8 प्रतिशत तक बढ़ता है। यह स्पष्ट करता है कि आयु के साथ-साथ मुख्यमंत्री धामी के प्रति जनता का भरोसा और भी गहरा होता जा रहा है।

सामाजिक वर्गों के हिसाब से भी भाजपा का प्रदर्शन व्यापक समर्थन का प्रदर्शन करता है। सर्वे के अनुसार, बनिया/कायस्थ समुदाय में समर्थन 57.3 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में 50.6 प्रतिशत, पंजाबी-सिख समुदाय में 49.7 प्रतिशत, ब्राह्मण वर्ग में 46.3 प्रतिशत, राजपूत वर्ग में 46.1 प्रतिशत और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग में 45.3 प्रतिशत दर्ज किया गया। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि धामी सरकार का प्रभाव एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के विविध सामाजिक संगठनों में कहीं न कहीं स्वीकार्य है।

हालांकि, 2027 के चुनाव अभी दूर हैं और राजनीतिक परिदृश्य समय के साथ बदल सकता है। विपक्षी दलों की रणनीति, आने वाले महीनों में उभरने वाले नए राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मुद्दे, और आर्थिक स्थितियों में वृद्धि या गिरावट जैसी घटनाक्रम इस तस्वीर को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी, वर्तमान सर्वे ने भाजपा के लिए एक मजबूत नींव रखी है और यह स्पष्ट करता है कि धामी सरकार ने अपनी कार्यवाही के जरिए मतदाताओं के मन में एक स्थिर विश्वास का भाव जगा लिया है।