उत्तरी उत्तराखंड के कर्णप्रयाग जिले के संकड गांव में तब तक निराशा का साया बना रहा, जब तक ग्रामीणों ने खुद गैंती, फावड़ा और बेलचा उठाकर सड़क निर्माण का काम नहीं शुरू किया। सालों‑सालों तक प्रशासन से “सड़क बनवाने” के वादे सुनते‑सुनते गांव वाले थक चुके थे; कई बार सर्वेक्षण भी किया गया, पर वह कागजों तक ही सीमित रह गया। अंततः जब जिला अधिकारी और स्थानीय विधायक अनिल नौटियाल ने तीन महीने के भीतर सर्वे और कटिंग का आश्वासन दिया, तो भी कोई मशीन या इंजीनियर नहीं पहुँचा। इस निरंतर धोखे के बाद, गांव वालों ने तय किया कि अब इंतज़ार नहीं, बल्कि खुद ही कदम उठाए जाएंगे।
सड़क की अनुपस्थिति ने ग्रामीणों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बेतहाशा कठिन बना दिया है। स्कूल‑जाने वाले बच्चों को नौ किलोमीटर की खुरदरी पगडंडी पर पैदल चलना पड़ता है, जबकि बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और रोगी अक्सर कंधों पर ले जाकर उसी दूरी को तय करते हैं। कई बार तो रोगी रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं, जिससे चिकित्सा सुविधा तक पहुँचने की आशा धूमिल हो जाती है। इस कष्ट को कम करने के लिए गांव वालों ने प्रशासन के कई दरवाज़े खटखटाए, अनगिनत पत्र लिखे और जनप्रतिनिधियों से हाथ जोड़े, पर हर बार केवल खोखले आश्वासनों के साथ जवाब मिला।
आख़िरकार, गांव के युवा और महिलाएँ मिलकर एक सामुदायिक कार्य समूह बनाते हुए, खुद ही सड़क की कटिंग शुरू कर दी। इस दृढ़ संकल्प को दर्ज करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे पूरे राज्य में सरकारी अकार्यक्षमता पर तीखा सवाल उठता है। ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संकड तक सड़क नहीं पहुँची, तो वे पूरी तरह से चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करेंगे, जिससे राजनीतिक दबाव और बढ़ जाएगा।
संकड गांव की इस पहल ने न केवल स्थानीय विकास की आवश्यकता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि जब प्रणाली जवाबदेह नहीं रहती, तो जनता खुद समाधान की राह चुन लेती है। अब यह देखना बाकी है कि सरकार इन जमीनी आवाज़ों को किस हद तक सुनती है और क्या वे इस संघर्ष को सतह पर लाने के बाद वास्तविक कार्रवाई करेंगे।
Original Title: उत्तराखंड में सिस्टम से हारे ग्रामीण, खुद सड़क बनाने उतरे
Original Content: जब सालों तक गांव वालों को सड़क बनवाने को लेकर खोखले आश्वासन मिलते रहे तब ग्रामिणों ने खुद ही गेती फावड़ा और बेलचा उठाकर खुद ही सड़क बनानी शुरु कर दी। ये पूरा मामला है उत्तराखंड के कर्णप्रयाग का। जहां जब सिस्टम गैरजिम्ममेदार हो गया तो ग्रामिणों ने अपने क्षेत्र के विकास का बीड़ा खुद ही उठा लिया।
उत्तराखंड में बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत
दरअसल हमारे राज्य में दावे तो बड़े-बड़े होते हैं। योजनाएं भी खूब चमचमाती हैं। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि आज अलग राज्य मिलने के दशकों बाद भी हमारे उत्तराखंड के कई गांव एक-एक किमी सड़क के लिए तरह रहे हैं। ये वीडियो कर्णप्रयाग के सकंड गांव का है। जहां ये बेबस और लाचार ग्रामीण हाथों में गैंती फावड़ा लेकर सड़क बनाने में जुटे हैं।
पैदल नौ किलोमीटर का सफर करना पड़ता है तय
इन गांव वालों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में पैदल नौ किलोमीटर का सफर करके अपने काम करने पड़ते हैं। रोज बच्चों को स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ती है। बीमार बुजुर्ग हों, या दर्द से कराहती गर्भवती महिलाएं, जब किसी को अस्पताल ले जाना होता है, तो मरीज को कंधों पर लादकर नौ किलोमीटर तक पैदल ले जाना पड़ता है। कई बार तो मरीज आधे रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
इलाके में सड़क बनवाने के लिए मदद की गुहार लगाई
इस गांव के लोगों ने अपने इलाके में सड़क बनवाने के लिए हर वो दरवाजा खटखटाया जहां से इन्हें मदद की उम्मीद थीप्रशासन को अनगिनत चिट्ठियां लिखी गईं। जिलाधिकारी के दफ्तर के चक्कर काटे गए। जनप्रतिनिधियों के सामने हाथ जोड़े लेकिन हर बार इन ग्रामिणों को खोखले आश्वासन ही मिले। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि गांव में सड़क बनवाने के लिए कई बार सर्वे भी हुए लेकिन वो सर्वे भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहे।
सड़क की मांग को लेकर आंदोनल भी किया
हालांकि इसी बीच गांव वालों ने सड़क की मांग को लेकर आंदोनल भी किया। मीडिया रिपोर्टस की मानें तो ग्रामिणों का कहना है कि उस वक्त क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया था और वादा किया था कि ‘तीन महीने के भीतर सड़क का सर्वे होगा और जल्द ही सड़क की कटिंग का काम शुरू हो जाएगा।
महीने बीत गए लेकिन सड़क का कुछ अता-पता नहीं
दिन बीते, हफ्ते बीते और महीने भी बीत गए, लेकिन सकंड गांव तक सड़क बनाने के लिए ना तो कोई मशीन आई ना ही कोई इंजीनियर वहां फटका। जिसके बाद सकंड गांव के लोगों ने ये तय किया कि अब वो किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएंगे और उन्होंने खुद ही सड़क बनाने का बीड़ा उठा लिया। जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
खुद ही सड़क बना रहे गांव वाले, वीडियो वायरल
ये वीडियो कहीं ना कहीं सिस्टम के मुंह पर भी एक करारा तमाचा है। मीडिया रिपोर्टस की मानें सकंड गांव के लोगों ने चेतावनी भी दी है कि अगर आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उनके गांव तक सड़क नहीं पहुंची तो सकंड गांव उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार कर देगा। अब आप सकंड गांव के लोगों के इस कदम को लेकर क्या सोचते हैं कमेंट करके जरूर बताइएगा
Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.
