विधायक निधि खर्च में यशपाल आर्य की कंजूसी ने छाया, कांग्रेस के गोपाल सिंह राणा ने की सर्वाधिक उपयोगिता

उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले में विधानसभा चुनावों का माहौल गरम होते ही, विधायक निधि के उपयोग पर एक रोचक खुलासा सामने आया है। सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने ग्राम विकास कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी हेमंती गुंजियाल से 2022 से जून 2026 तक के खर्चा‑ब्योरे की मांग की, जिसमें नौ विधायकों में से नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के बाजपुर विधायक यशपाल आर्य ने केवल 55 प्रतिशत निधि खर्च कर सबसे कम उपयोगकर्ता साबित हुए। आर्य ने 1,556.32 लाख रुपये के 484 प्रस्ताव दायर किए, जिनमें से 480 कार्य स्वीकृत हुए और 1,303.11 लाख रुपये का अधिकांश खर्च किया गया। कुल मिलाकर 1,316.39 लाख रुपये व्यय हुए, जिनमें 385 सामान्य, 73 अनुसूचित जाति (एससी) और 22 अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के कार्य शामिल थे; 429 कार्य पूर्ण और 51 कार्य प्रगति पर हैं।

आर्य के बाद कंजूसी में भाजपा विधायक शिव अरोड़ा का नाम आता है, जिन्होंने 67 प्रतिशत निधि खर्च कर आठवें स्थान पर रहे। अरोड़ा ने 1,796.55 लाख रुपये के 454 प्रस्ताव दायर किए, जिनमें 450 कार्य स्वीकृत और 1,579.03 लाख रुपये खर्च हुए। कुल व्यय 1,592.31 लाख रुपये रहा, जिसमें 352 सामान्य, 71 एससी और 27 एसटी कार्य शामिल थे; 430 कार्य पूर्ण और 20 कार्य अभी भी चल रहे हैं।

कांग्रेस के नानकमत्ता विधायक गोपाल सिंह राणा ने 74 प्रतिशत खर्च कर शीर्ष स्थान हासिल किया। उन्होंने 1,837.19 लाख रुपये की लागत वाले 555 विकास कार्यों के प्रस्ताव दायर किए, जिनमें 1741.08 लाख रुपये पूरी तरह खर्च हुए और कुल व्यय 1,754.36 लाख रुपये रहा। स्वीकृत कार्यों में 377 सामान्य, 22 एससी और 156 एसटी वर्ग के कार्य शामिल थे, जिनमें से 542 कार्य पूर्ण और 13 कार्य जारी हैं। इस क्रम में भाजपा के सितारगंज विधायक सौरभ बहुगुणा (72 प्रतिशत), भाजपा के काशीपुर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा (71 प्रतिशत), भाजपा के गदरपुर विधायक अरविंद पाण्डे (70 प्रतिशत), कांग्रेस के किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ (69.12 प्रतिशत) और कांग्रेस उपनेता भुवन चंद्र कापड़ी (68.12 प्रतिशत) क्रमशः दूसरे से छठे स्थान पर रहे।

समग्र रूप से, उधमसिंह नगर के नौ विधायकों को प्रति विधायक औसत 23.75 करोड़ रुपये की दर से कुल 213.75 करोड़ रुपये की निधि आवंटित की गई है। अब तक 68 प्रतिशत यानी 145.86 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि लगभग 67.89 करोड़ रुपये अभी शेष हैं। चुनाव से पहले इस निधि के उपयोग को दिखाना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन सकता है, जिससे जनता को विकास कार्यों की उपलब्धता का आभास हो।