भूस्खलन के बाद चमेलिया नदी पर हाई अलर्ट, उत्तराखंड की सीमाएँ तैयार

नेपाल के दार्चुला जिले के गेठीगाड़ा गाँव के पास एक विशाल भूस्खलन ने एक बड़े पहाड़ के टुकड़े को तोड़कर चमेलिया नदी में गिरा दिया है। इस अचानक मलबे के जमा होने से नदी का बहाव रुक गया है और हजारों लीटर पानी एक अस्थायी झील बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह झील टूटती है, तो पानी का प्रवाह उत्तराखंड की सीमाओं पर पहुँच कर एक बड़े बाढ़ के रूप में प्रकट हो सकता है।

इस खतरे को देखते हुए पिथौरागढ़ प्रशासन ने तुरंत हाई अलर्ट जारी कर दिया है। सीमा पर तैनात SSB और ITBP के जवानों को भी इस स्थिति से अवगत कराया गया है, ताकि वे किसी भी आकस्मिक घटना के लिए तैयार रहें। अधिकारियों ने कहा है कि वर्तमान में चमेलिया नदी का बहाव शांत दिख रहा है, परन्तु लगातार बारिश के साथ मलबे के और गिरने से स्थिति बिगड़ सकती है।

भू‑स्खलन के कारण बने झील के फटने की संभावना के चलते पिथौरागढ़ के आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को नदी के किनारे न जाने की कड़ी चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने नदियों के किनारे बसे सभी गाँवों में अलर्ट मोड सक्रिय कर दिया है और सतर्कता बरतने का निर्देश जारी किया है।

उत्तराखंड में पहले से ही 1200 से अधिक ग्लेशियर झीलें मौजूद हैं, जिनमें से 13 अत्यंत संवेदनशील मानी जाती हैं। यदि इन झीलों में से किसी में भी हलचल होती है, तो केदारनाथ, धराली और रैंणी जैसे क्षेत्रों में फिर से बाढ़ की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं। इसलिए पिथौरागढ़ प्रशासन ने निरंतर निगरानी और आपातकालीन योजनाओं को तैयार रखा है।

SSB और ITBP के जवान पूरी तरह से तैयार हैं, और स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। इस बीच, सीमा पर स्थित दोनों देशों के अधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं, ताकि किसी भी अनिश्चित परिस्थिति में समय रहते कदम उठाया जा सके।