उत्तराखंड में निकाहनामा का मसौदा तैयार, यूसीसी के बाद नई पंजीकरण व्यवस्था की दिशा

उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) के कार्यान्वयन के बाद निकाह के पंजीकरण को सुदृढ़ करने के लिये एक विशिष्ट “निकाहनामा” फॉर्म तैयार करने की पहल शुरू कर दी है। इस दिशा में एक विशेष समिति गठित की गई है, जिसमें राज्य के विधायी सलाहकार, सामाजिक कार्यकर्ता, धर्मशास्त्री और क़ानून विशेषज्ञ शामिल हैं।

समिति का मुख्य उद्देश्य एक मानकीकृत प्रारूप तैयार करना है, जिससे विभिन्न धर्मों के बीच वैवाहिक अनुबंध को आसानी से दर्ज किया जा सके और भविष्य में उत्पन्न हो सकने वाले कानूनी विवादों से बचा जा सके। इसके तहत निकाह के समय आवश्यक दस्तावेज़, गवाहों की संख्या, पंजीकरण शुल्क और वैवाहिक अधिकारों की स्पष्ट रूपरेखा तय की जाएगी।

राज्य के गृह मंत्री ने कहा, “UCC के साथ निकाहनामा को आधिकारिक रूप देना सामाजिक समरसता को बढ़ावा देगा और इंटरफेथ विवाहों को वैधता प्रदान करेगा। हम चाहते हैं कि हर दंपति को उनके अधिकारों की पूरी जानकारी हो और उनका वैवाहिक जीवन सुरक्षित रहे।”

प्रस्तावित फॉर्म में पहले से ही धर्मनिरपेक्षता को ध्यान में रखते हुए, महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा, संपत्ति के अधिकार, तलाक की प्रक्रिया और बाल अधिकारों के प्रावधान शामिल किए जाएंगे। साथ ही, ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी प्रदान करने की योजना है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले जोड़े भी आसानी से अपने निकाह को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करा सकें।

इस पहल को लागू करने के लिए सरकार ने अगले तीन महीनों में सार्वजनिक परामर्श सत्र आयोजित करने का इरादा जताया है, जिससे विभिन्न समुदायों की राय को फॉर्म में सम्मिलित किया जा सके। यदि यह मसौदा अनुमोदित हो जाता है, तो उत्तराखंड में निकाहनामा का आधिकारिक प्रयोग 2025 की शुरुआत में शुरू हो सकता है।

इस कदम को कई सामाजिक संगठनों ने सकारात्मक रूप में सराहा है, जबकि कुछ धार्मिक समूह अभी भी इस नई व्यवस्था के संभावित सामाजिक प्रभावों को लेकर सतर्क हैं। आगे की जानकारी के लिये राज्य सरकार ने एक समर्पित पोर्टल खोलने की घोषणा की है, जहाँ नागरिक फॉर्म का ड्राफ्ट देख सकेंगे और अपनी सुझाव दे सकेंगे।