कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी रैली के बाद शुद्धिकरण का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर गरमाया है। लेकिन सवाल यह है कि जब यह मुद्दा शांत हो चुका था, तो कांग्रेस फिर से भाजपा पर हमलावर क्यों हो गई है? इसके पीछे 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में वोटरों का रुझान और कांग्रेस का अपना खोया सामाजिक आधार वापस पाने की कोशिश है।
कांग्रेस क्यों उठा रही शुद्धिकरण का मुद्दा?
2022 के चुनाव के बाद सीएसडीएस-लोकनीति के सर्वे से पता चला कि मुस्लिम विवि और नमाज की छुट्टी जैसे मुद्दों ने उत्तराखंड को ध्रुवीकृत किया। इससे दलित और मुसलमान वोट कांग्रेस की ओर गए, जबकि ब्राह्मण और क्षत्रिय वोट भाजपा की ओर।
सीएसडीएस-लोकनीति के अनुसार, उत्तराखंड में 12% ब्राह्मण, 33% ठाकुर, 7% अन्य सवर्ण, 7% अन्य पिछड़ा वर्ग, 19% दलित, 14% मुसलमान और 8% अन्य वोटर हैं। कांग्रेस का परंपरागत वोटर आधार ब्राह्मण, दलित और मुसलमान हुआ करता था, लेकिन समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के उदय के बाद मुस्लिम और दलित वोटर कांग्रेस से छिटक गए।
आंकड़ों में छिपा मौजूदा सियासी तूफान का रहस्य
सीएसडीएस-लोकनीति के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में भाजपा को 63% ब्राह्मणों का साथ मिला, जो 2017 में 52% था। ठाकुरों का समर्थन भी 2017 के 53% से बढ़कर 60% हो गया। लेकिन दलित वोट भाजपा से छिटकता दिख रहा है। 2017 में भाजपा को 37% दलितों ने वोट दिया, जबकि 2022 में यह 26% रह गया।
अब कांग्रेस की बात करें, तो उसका सवर्ण वोट आधार घटा है, जबकि दलितों और मुसलमानों में आधार बढ़ा है। 2017 में कांग्रेस को 28% ब्राह्मणों ने वोट दिए, जबकि 2022 में यह 26% हो गया। लेकिन दलितों में कांग्रेस का समर्थन दोगुने से ज्यादा हो गया। 2017 में 23% दलितों ने कांग्रेस को वोट दिया, जबकि 2022 में यह 48% पहुंच गया।
कांग्रेस को पहाड़ में दलितों का समर्थन
सीएसडीएस-लोकनीति के सर्वेक्षण के अनुसार, कुमाऊं, गढ़वाल और मैदान के हिसाब से देखें तो भाजपा को सभी क्षेत्रों में ब्राह्मणों और ठाकुरों का भरपूर समर्थन मिला। कांग्रेस को पहाड़ में दलितों का काफी समर्थन मिला, लेकिन मैदानी क्षेत्र में दलित वोट कांग्रेस की बजाय बसपा की ओर गया।
बसपा की ओर पूरी तौर पर नहीं लौटे दलित
सर्वे के आंकड़े के मुताबिक, 2022 में दलित बसपा की ओर नहीं लौटे। बसपा को 2017 में प्रदेश में 27% दलितों का वोट मिला था, जो 2022 में घटकर 16% रह गया। लेकिन बसपा का मुस्लिम आधार दो प्रतिशत बढ़ा।
