गणेश चतुर्थी 2024 का अनोखा संगम – भक्ति, परंपरा और ज्योतिषीय निर्देश

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गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान गणेश के जन्म का उत्सव मनाने के लिए मनाया जाता है। वर्ष 2024 में यह पर्व 7 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भक्तगण भगवान गणेश की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। हालांकि, इस पर्व के साथ एक विशेष निषेध भी जुड़ा हुआ है – चंद्र दर्शन का वर्जन।

शुभ मुहूर्त:

  • दिनांक: 7 सितंबर 2024 (शनिवार)
  • चतुर्थी तिथि: शाम 5:37 तक
  • चित्रा नक्षत्र: दोपहर 12:34 तक
  • विष्टि करण (भद्र): शाम 5:37 तक
  • चंद्रमा की स्थिति: तुला राशि में पूर्ण रूप से स्थित

पूजा एवं मूर्ति स्थापना का मुहूर्त:
समय: प्रातः 11:03 से दोपहर 1:34 तक

चंद्र दर्शन वर्जित समय:
प्रातः 9:30 से रात्रि 8:45 तक

चंद्र दर्शन का निषेध:
गणेश चतुर्थी की रात्रि में चंद्रमा के दर्शन को अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर बिना किसी कारण के चोरी का आरोप लग सकता है। यह निषेध एक पौराणिक कथा पर आधारित है।

पौराणिक कथा:
कहा जाता है कि एक बार भगवान गणेश अपने प्रिय मोदक और लड्डू खा रहे थे। उनका विशाल पेट और हाथी का मुख देखकर चंद्रमा को हंसी आ गई। गणेश जी इस व्यवहार से क्रोधित हो गए और चंद्रमा को शाप दिया कि उनका क्षय होगा और जो भी उस रात उन्हें देखेगा, वह कलंकित होगा।

यहां तक कि भगवान श्री कृष्ण भी एक बार इस शाप के शिकार हुए थे। उन्हें भी स्यमंतक मणि की चोरी का झूठा आरोप झेलना पड़ा था।

उपाय:
यदि कोई व्यक्ति भूलवश चंद्रमा को देख लेता है, तो उसे श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के अध्याय 56 और 57 में वर्णित स्यमंतक मणि चोरी की कथा किसी विद्वान पंडित से सुननी चाहिए। यह उपाय झूठे कलंक के खतरे को कम कर सकता है।

पूजा विधि:

  1. प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. षोडशोपचार विधि से भगवान गणेश की पूजा करें।
  3. गणेश जी को स्नान कराएं (पंचामृत स्नान और फिर शुद्ध जल से)।
  4. रोली और अक्षत चढ़ाएं।
  5. 11 मोदक या लड्डू अर्पित करें।
  6. दूर्वा (एक-एक करके) चढ़ाएं।
  7. फल और अन्य भेंट चढ़ाएं।

निष्कर्ष:
गणेश चतुर्थी एक ऐसा पर्व है जो भक्ति और सावधानी का संगम है। जहां एक ओर भगवान गणेश की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है, वहीं दूसरी ओर चंद्र दर्शन के निषेध का पालन करके अनावश्यक कष्टों से बचा जा सकता है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि किसी के रूप-रंग या शारीरिक बनावट पर हंसना या टिप्पणी करना अनुचित है।

लेखक: आचार्य पंडित प्रकाश जोशी गेठिया, नैनीताल

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