हॉल्द्वानी के 20‑साल के धूर्त ने AI से बनाई फर्जी मेजर की पहचान, 10 से अधिक लड़कियों को फँसाया

हॉल्द्वानी के एक 20‑साल के युवक, रोहित सिंह मेहता, ने इंस्टाग्राम पर भारतीय सेना के पैरास्पेशल फोर्सेज़ के मेजर का नकली प्रोफ़ाइल तैयार किया। मूल रूप से चम्पावत के कानीकोट का रहने वाला रोहित, इंटरनेट से सेना के वास्तविक अधिकारियों की उच्च‑रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें डाउनलोड कर, AI‑ऐप्स की मदद से उन पर अपना चेहरा चिपका कर पूरी तरह से संशोधित कर देता है। इस प्रक्रिया से बनी तस्वीरें इतनी बारीकी से मोर्फ़ की गई थीं कि दर्शकों को धोखा देना आसान हो गया।

अपनी नई पहचान को पुख्ता करने के लिए उसने एक फर्जी आर्मी आईडी कार्ड भी तैयार किया और इन्हें अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट कर दिया। तस्वीरों में हरी‑बैग, कैमोफ़्लाज़ वर्दी और मेजर की रैंक दिखती थी, जिससे कई युवा महिलाएँ प्रभावित हो गईं। दिल्ली, देहरादून और केरल की 10 से अधिक लड़कियों ने रोहित को सीधे संदेश भेजना शुरू कर दिया।

रोहित ने घंटों तक चैट करके खुद को एक टॉप सीक्रेट मिशन पर रहने वाले सैनिक के रूप में पेश किया। जब भी कोई वीडियो कॉल की मांग करती, वह “सुरक्षा कारणों से” अपना चेहरा नहीं दिखा सकता, ऐसा बहाना देता। इस तरह वह अपने फर्जी बहादुरी के किस्से सुनाते हुए लड़कियों को अपने जाल में फँसाता रहा।

वास्तव में रोहित ने कभी सेना में भर्ती होने की कोशिश की थी, पर शारीरिक परीक्षा पास न कर पाने के कारण उसका सपना अधूरा रह गया। फिर भी फौजी बनने की तीव्र इच्छा ने उसे AI के ज़रिए खुद को मेजर घोषित करने के रास्ते पर ले गया।

1 सितंबर को मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) ने रोहित की प्रोफ़ाइल पर नजर डाली। आधिकारिक सेना डेटाबेस में “मेजर रोहित” नाम का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलने पर उन्होंने तुरंत नैनिताल पुलिस को सूचित किया। नैनिताल के एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने केस को संवेदनशील मानते हुए कार्रवाई शुरू की। साइबर टीम ने रोहित के मोबाइल नंबर को ट्रैक किया और उसकी लोकेशन का पता लगाया।

एसओजी की टीम ने हॉल्द्वानी के बिड़ला ओपीएस गोदाम में रोहित को पाया, जहाँ वह मजदूरी कर रहा था। गोदाम के भीतर की जाँच में पुलिस को दो स्मार्टफ़ोन, फर्जी सेना आईडी, आधार कार्ड और पैन कार्ड मिले। फोन की गैलरी में AI‑से बनी दर्जनों नकली तस्वीरें और वीडियो थे, जिनका इस्तेमाल वह लड़कियों को धोखा देने में करता था।

इस खुलासे के बाद पूरे उत्तराखंड में मामला चर्चा का विषय बन गया, और सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान के खतरों पर चेतावनी जारी की जा रही है।