देशभर के करोड़ों बैंक ग्राहकों और व्यापारी वर्ग के लिए राहत की खबर सामने आई है। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बीच हुई गहन बातचीत के बाद, प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल को फिलहाल टाल दिया गया है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत, सोमवार से सभी बैंकिंग सेवाएं पूर्णतः सामान्य मोड में संचालित होंगी, जिससे ग्राहकों को अपने जमा-निकासी और अन्य लेन-देन के लिए संकट के घेरे में नहीं पड़ना पड़ेगा। यह फैसला UFBU द्वारा 27 सितंबर की रात करीब 9:30 बजे जारी किए गए सर्कुलर के जरिए आधिकारिक रूप से पक्का हुआ, जिसमें संबंधित समिति द्वारा सभी संभावित विकल्पों पर विचार करने और सभी पक्षों से बातचीत के बाद एक ऐसे समाधान को अपनाए जाने का आश्वासन दिया गया है, जो न केवल कर्मचारियों की रक्षा करे बल्कि ग्राहकों के लिए भी स्वीकार्य हो।
हड़ताल का यह बड़ा आह्वान UFBU की ओर से शुक्रवार को किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार के साथ हुए पुराने समझौतों में शामिल लंबित मांगों और वादों की पूर्ति के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित करना था। यूनियनों ने स्पष्ट रूप से जताया था कि उनका कोई भी उद्देश्य आम ग्राहकों को परेशान करना नहीं है, बल्कि लंबे समय से अनसुनी हो रही समस्याओं को सामने लाना है। हालांकि, IBA और UFBU के बीच हुए संयुक्त बैठक के बाद स्थिति में सुधार आया। बैठक में न केवल हड़ताल के तुरंत आह्वान को टाला गया, बल्कि व्यापक स्तर पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई, जिससे बैंकिंग क्षेत्र में तनाव कम हुआ।
बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में ‘फाइव-डे वीक’ यानी सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करना शामिल है, जिसके तहत शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश दिया जाए। यूनियनों का दलील है कि इस मुद्दे समेत समझौते में शामिल कई अन्य मांगें लंबे समय से लंबित हैं और इनका त्वरित समाधान आवश्यक है। इसके अलावा, बैठक में स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए प्रस्तावित ‘परफॉर्मेंस लिंक्ड इन्सेंटिव’ (PLI) स्कीम पर भी गहन चर्चा की गई। यूनियनों और बैंक अधिकारियों दोनों की ओर से जो आपत्तियां उठी हैं, उनको दूर करने के लिए IBA सरकार के समक्ष बदलाव का प्रस्ताव पेश करेगा। यह कदम दोनों पक्षों के लिए संतुलन बिंदु खोजने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी प्रयास है।
इस समझौते के तर्ज पर, 8 मार्च 2024 के मिनट्स में उल्लेखित हुए सभी लंबित मुद्दों पर भी जल्द बातचीत कर नतीजे निकालने के लिए दोनों पक्षों के सहमति बनी है। यह निर्णय न केлько बैंकिंग क्षेत्र में स्थिरता की पुष्टि करने का संकेत है, बल्कि यह यह भी दिखाता है कि संस्थाओं और कर्मचारी संघों के साथ-साथ ग्राहकों के हितों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। अब ग्राहकों को इस बात का विश्वास है कि सोमवार से बैंकिंग सेवाओं में कोई बाधित नहीं होगा, और न्यायसंगत मांगों के पूर्ण निवारण के लिए प्रक्रिया जारी रहेगी।
