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नवनियुक्त राज्यसभा सांसद दिनेश आर्य ने रविवार को हल्द्वानी पहुँच कर पार्टी कार्यकर्ताओं का जोरदार स्वागत प्राप्त किया। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गढ़धारी लाल साहू के बीच चल रहे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। आर्य ने गढ़धारी लाल साहू के चरित्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह बरेली के जिले के प्रमुख हैं और इसी कारण से वे नैनीताल जिले में आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि “सभी लोग जानते हैं कि गढ़धारी लाल साहू का चरित्र कैसा है।”
दिनेश आर्य ने गढ़धारी लाल साहू के खिलाफ यह आरोप लगाया कि उनकी राजनीतिक गतिविधियाँ और व्यक्तिगत छवि पर सवाल उठाने से समाज में अविश्वास पैदा हो रहा है। उन्होंने बताया कि गढ़धारी लाल साहू की नीतियों और कार्यों ने स्थानीय स्तर पर कई लोगों को प्रभावित किया है और इसीलिए उनकी प्रतिष्ठा पर सवाल उठाना अनिवार्य है। इस बिंदु पर आर्य ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है, न कि किसी व्यक्तिगत विरोध को बढ़ावा देना।
इसके अलावा, सांसद ने अंकिता भंडारी प्रकरण पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्ष को आरोप लगाया कि वह इस मामले में अपने परिवार को बेवजह उकसाकर राजनीति कर रहा है। आर्य ने कहा कि विपक्ष की यह चाल सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिये है और इससे समाज में अनावश्यक अशांति पैदा हो रही है। उन्होंने इस पर भी जोर दिया कि ऐसे मामलों में निष्पक्षता और साक्ष्य-आधारित निर्णय आवश्यक हैं।
राज्यसभा के इस नए सदस्य की यह सार्वजनिक टिप्पणी हल्द्वानी और पूरे उत्तराखंड की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ती है। गढ़धारी लाल साहू के चरित्र पर उठाए गए सवाल और अंकिता भंडारी प्रकरण पर विपक्षी आलोचना दोनों ही राजनीतिक पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करते हैं। दिनेश आर्य के इस कदम से स्पष्ट होता है कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र और पूरे राज्य के हितों को आगे रखने के लिए तैयार हैं, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल के साथ जुड़ी हो।
