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ट्रैवलिंग ऐप्स के ‘सफ़र‑साथी’ से बनी दहशत: मसूरी में रेप केस, दिल्ली युवक को जेल

डिजिटल युग में डेटिंग ऐप्स के बाद अब ट्रैवलिंग ऐप्स ने भी युवा वर्ग, विशेषकर जनरेशन‑ज़ी को आकर्षित किया है। गैफल, टूरलीना, ट्रिपबीएफएफ, बैकपैकर, फेयरीट्रेल, ट्रैवल बडी और टोलो इंडिया जैसी प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ताओं को अपनी यात्रा‑गंतव्य, तिथि और शर्तें दर्ज करके अनजान मुसाफिरों के साथ ‘ट्रैवल पार्टनर’ बुक करने की सुविधा देती हैं। इन ऐप्स में प्रोफ़ाइल देखना, चैट करना और यात्रा की लागत व शर्तें गिफ़्ट‑फ़ॉर्मेट में दर्ज कर भुगतान करना आसान प्रक्रिया बन गया है। ट्रेस्पॉट जैसे ऐप्स तो ट्रैवल डेटिंग और चैट फ़ीचर को भी एक साथ पेश कर रहे हैं, जिससे पुरुष‑और‑महिला दोनों ही अपने मनचाहे साथी को चुन सकते हैं।

ऐसे ही एक घटना ने उत्तराखंड के मसूरी में ट्रैवलिंग ऐप्स की भरोसेमंदता पर सवाल खड़े कर दिया। दिल्ली का एक युवक और ऋषिकेश की एक युवती ने एक ऑनलाइन ट्रैवल ऐप के माध्यम से संपर्क स्थापित किया, एक‑दूसरे को ‘ट्रैवल पार्टनर’ चुना और दो दिन की यात्रा के लिए मसूरी पहुँचे। दोनों ने स्थानीय वादियों में एक साथ समय बिताया, लेकिन यात्रा समाप्त होने के दो दिन बाद युवती ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में जाकर युवक पर गंभीर यौन उत्पीड़न (रेप) का आरोप लगाया। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया, युवक को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।

इस केस ने ट्रैवलिंग ऐप्स के उपयोग में सुरक्षा की कमी को उजागर किया। ऐप पर यात्रा‑साथी की पहचान, इरादे और पिछला रिकॉर्ड सत्यापित करने की कोई गारंटी नहीं है, जबकि उपयोगकर्ता अक्सर भुगतान, रहने‑खाने की शर्तें और अन्य व्यक्तिगत जानकारी पहले से दर्ज कर देते हैं। इस प्रकार के प्लेटफ़ॉर्म पर अनजान व्यक्ति के साथ यात्रा करना, यदि उचित सतर्कता न बरती जाए, तो संभावित अपराधियों को अवसर प्रदान कर सकता है। पुलिस वर्तमान में इस मामले की गहन जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दो दिन के साथ‑सफ़र में कौन‑सी घटनाएँ घटित हुईं और भविष्य में ऐसे जोखिमों को कैसे रोका जाए।

मसूरी का यह शोकपूर्ण उदाहरण उन हजारों‑लाखों युवाओं के लिए एक चेतावनी बन गया है, जो बैग पैक करके अनजान के भरोसे यात्रा करने का विचार रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैवलिंग ऐप्स को उपयोगकर्ता सुरक्षा के लिए कठोर सत्यापन प्रक्रिया, आपातकालीन संपर्क विकल्प और यात्रा‑साथी की पृष्ठभूमि जांच जैसी सुविधाएँ अनिवार्य करनी चाहिए, ताकि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर यात्रा‑साथी चुनते समय जोखिम कम हो सके।

Original Title: Traveling Apps का खतरनाक खेल!, देहरादून में अनजान साथी के साथ सफर…फिर FIR!

Original Content: डेटिंग ऐप्स के साइड इफेक्ट्स तो हम सब जानते हैं, लेकिन अब बाजार में आ गए हैं ‘ट्रैवलिंग ऐप्स’। ये वो ऐप्स हैं जो अनजान लोगों को साथ सफर करने का मौका देते हैं। लेकिन उत्तराखंड के से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिसने इन ऐप्स के भरोसे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

GEN Z कर रहे ट्रैवलिंग ऐप्स का इस्तेमाल

आज के GEN Z ट्रैवलिंग ऐप्स का बहुत इस्तेमाल करते हैं। डेटिंग ऐप्स के बाद ये ट्रैवलिंग ऐप्स भी GEN Z के लिए अपने लिए पार्टनर ढूंढने का जरिया बन गई है। आज की डेट में गैफल (Gaffl), टूरलीना (Tourlina), ट्रिपबीएफएफ (TripBFF), बैकपैकर, फेयरीट्रेल, ट्रैवल बडी और टोलो इंडिया जैसे ट्रैवलिंग ऐप्स अनजान मुसाफिरों को एक-दूसरे से जोड़ने का दावा कर रहे हैं।

ट्रैवलिंग एप पर बुक कर सकते है ट्रैवल पार्टनर

तरीका बहुत आसान है। अपनी डेस्टिनेशन डालिए, तारीख चुनिए, सामने वाले की प्रोफाइल देखिए, अगर पसंद आ जाए तो चैट कीजिए और बस, बन गए आप ट्रैवल पार्टनर। इसके अलावा ट्रेस्पॉट (Trotspot) जैसे ऐप तो बाकायदा ट्रैवल डेटिंग और चैट के फीचर भी दे रहे हैं।

इन सभी ट्रैवलिंग ऐप पर लड़का या लड़की दोनों ट्रैवल पार्टनर बुक कर सकते हैं। बुकिंग से पहले रहने, खाने और शॉपिंग की शर्तें ऐप पर मेंशन करनी पड़ती हैं। ऐप पर इन शर्तों को गिफ्ट के तौर पर दर्ज किया जाता है। ट्रैवल पार्टनर के लिए बुकिंग से अलग एक अमाउंट भी तय किया जाता है।

देहरादून में ट्रैवल ऐप ने पहुंचाया जेल

तय रकम बुकिंग करने वाले को ट्रैवल पार्टनर को देनी पड़ती है। बुकिंग से पहले खर्च और शर्तों की जानकारी ऐप पर तय होती है। लेकिन सवाल ये है कि जिस प्रोफाइल पिक्चर को देखकर आप मुस्कुरा रहे हैं जिसके साथ टाइम स्पेंड करने और घूमने फिरने के सपने सजा रहे हैं। उसके पीछे असल में कौन है, उसकी नीयत क्या है क्या है? क्या उसपर भरोसा किया जा सकता है? देहरादून का ये मामला आपको हैरान कर देगा और आप भी इन ट्रैवलिंग ऐपस को इस्तेमाल करने से पहले 10 बार सोचोगे।

ऋषिकेश की युवती ने चुना ट्रैवल पार्टनर

दरअसल दिल्ली का रहने वाला एक युवक और ऋषिकेश की रहने वाली एक युवती दोनों इसी तरह एक ऑनलाइन ट्रैवल ऐप के जरिए मिले। दोनों ने एक दूसरे को अपना ‘ट्रैवल पार्टनर’ चुना और पहुंच गए मसूरी। दोनों ने दो दिन तक मसूरी की वादियों में एक साथ वक्त बिताया। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया।

दो दिन बाद पुलिस में की कंपलेन

दो दिन बाद अचानक युवती ने पुलिस स्टेशन जाकर उस दिल्ली वाले युवक पर रेप का संगीन आरोप लगा दिया। पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया, मुकदमा दर्ज किया और उस ‘सफर के साथी’ को गिरफ्तार कर सीधा जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।अब पुलिस इस उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने में लगी है।

पुलिस कर रही मामले की जांच

आखिर उन दो दिनों में बंद कमरों में ऐसा क्या हुआ? क्योंकि ऑनलाइन दोस्ती में सबसे बड़ा खतरा यही है कि सामने वाले की पहचान, नीयत और पिछला रिकॉर्ड कितना सही है। इसकी गारंटी कोई ऐप नहीं देता। मसूरी का ये मामला उन हजारों-लाखों युवाओं के लिए भी एक बहुत बड़ा अलार्म है, जो अपना बैग पैक करते हैं और किसी अनजान के भरोसे सफर पर निकल पड़ते हैं। Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।