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केदारनाथ में वीआईपी खर्च को लेकर बीकेटीसी में महाभारत

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शासन के पत्र के बाद पूर्व अधिकारियों के समर्थन में गढ़े जा रहे तर्क

जांच रिपोर्ट के बाद शासनादेशों का हवाला और फंसाने की साजिश !

अविकल थपलियाल

देहरादून/गोपेश्वर। केदारनाथ धाम के वर्ष 2025 के कपाटोद्घाटन के दौरान वीआईपी अतिथियों के स्वागत-सत्कार पर हुए खर्च को लेकर ‘अविकल उत्तराखण्ड’ में जांच समिति की संस्तुति सम्बन्धी खबर के बाद नई बहस ने जन्म ले लिया है।

शनिवार को सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर एक खबर तेजी से वायरल होने के बाद विवाद और गहरा गया है।
शासन के 25 जून 2026 के पत्र के हवाले से जारी खबर में इस व्यय को वित्तीय अनियमितता से जोड़ते हुए तत्कालीन अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
इसके बाद मामले से जुड़े पक्षों ने शासन के पुराने आदेशों और वित्तीय अधिकारों का हवाला देते हुए इन आरोपों को तथ्यहीन और एकतरफा बताया है। यह भी चर्चा है कि जांच समिति ने सम्बंधित अधिकारियों का पक्ष सुना ही नहीं गया।

केदारनाथ में वीआईपी खर्च को लेकर बीकेटीसी में महाभारत
केदारनाथ में वीआईपी खर्च को लेकर बीकेटीसी में महाभारत

मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिस समय 2 मई 2025 को केदारनाथ और 4 मई को बदरीनाथ धाम के कपाट खुले, उस समय बीकेटीसी में न तो अध्यक्ष था और न ही नया बोर्ड गठित हुआ था। तत्कालीन अध्यक्ष अजेंद्र अजय का कार्यकाल 7 जनवरी 2025 को समाप्त हो चुका था, जबकि नए अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने 6 मई 2025 को कार्यभार संभाला। ऐसे में समिति के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों का संचालन तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल के पास था।
संबंधित पक्षों ने 22 नवंबर 2012 के धर्मस्व विभाग के कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा है कि अध्यक्ष का पद रिक्त रहने की स्थिति में मुख्य कार्याधिकारी को समिति के दैनिक एवं गैर-नीतिगत कार्यों के संचालन का अधिकार दिया गया था।

इसके अलावा 29 मार्च 1985 के तत्कालीन उत्तर प्रदेश शासन के आदेश में भी मुख्य कार्याधिकारी को प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार प्रदान किए गए थे। उनका दावा है कि वीआईपी अतिथियों के स्वागत, आवास, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं पर हुआ खर्च इन्हीं अधिकारों और समिति के स्वीकृत बजटीय प्रावधानों के तहत किया गया।

केदारनाथ में वीआईपी खर्च को लेकर बीकेटीसी में महाभारत

इस बीच, भाजपा नेत्री आशा नौटियाल,नेहा जोशी समेत अन्य वीआईपी के केदारनाथ प्रवास के दौरान बिल भुगतान का मामला मीडिया की सुर्खियां बना।
इसके बाद वर्तमान बीकेटीसी प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट भी चर्चा में है।

सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में वीआईपी सत्कार मद में हुए खर्च को वित्तीय अनियमितता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, संबंधित पक्षों का आरोप है कि जांच में लागू शासनादेशों और मुख्य कार्याधिकारी के अधिकारों का समुचित उल्लेख नहीं किया गया।

सूत्रों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, तत्कालीन प्रभारी अधिकारी केदारनाथ अनिल ध्यानी तथा संबंधित व्यवस्थापक अरविंद शुक्ला के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

दूसरी ओर, इन अधिकारियों के समर्थन में सामने आए पक्षों का कहना है कि उस समय की प्रशासनिक परिस्थितियों और लागू नियमों को नजरअंदाज कर पूरे मामले को वित्तीय अनियमितता का रूप दिया जा रहा है।
इधर,  कपाट खुलने के दौरान वीआईपी सत्कार पर हुआ व्यय शासनादेशों के अनुरूप बताया जा रहा है।
इन्हीं वित्तीय अधिकारों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के तहत तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल द्वारा 2 मई 2025 को श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर वीआईपी अतिथियों के स्वागत, आवास, भोजन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए मंदिर समिति के बजटीय प्रावधानों के अंतर्गत व्यय स्वीकृत किए गए तथा संबंधित भुगतान किए गए।
सूत्रों के अनुसार यह समस्त व्यय मंदिर समिति के स्थापित प्रावधानों और परंपरागत व्यवस्थाओं के अनुरूप किया गया था।

केदारनाथ में वीआईपी खर्च को लेकर बीकेटीसी में महाभारत

फिलहाल, बदरीनाथ चंदा चोरी प्रकरण के साथ बीकेटीसी का वीआईपी बिल भुगतान की जांच ने मंदिर समिति में जारी महाभारत की कलई भी खोल दी है। कौन किसके सिर पर आरोपों की मटकी फोड़ रहा है। यह भी चर्चा के केंद्र में है।

Pls clik-क्या है बिल भुगतान का मसला

बीकेटीसी के खजाने से बड़े लोगों के बिल भुगतान पर उठे सवाल

केदारनाथ के वीआईपी अतिथियों के बिलों में गड़बड़ी की पुष्टि

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admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।