📅 Thursday, 01 October 2026 ⛅ 24°C नैनीताल / देहरादून 📈 SENSEX +420.5 (82,140)
Ad Space (728x90) - Appearance > Customize > Ad Placements
⚡ ब्रेकिंग न्यूज़
🔴 उत्तराखंड में मिलेट्स की सरकारी खरीद — 1 अक्टूबर से शुरू, मंडुवा की कीमत बढ़ी 52.05 रुपये/किलो 🔴 उत्तराखंड में दिव्यांग बच्चों के लिए नया युग: अठावले ने शुरू किया ऐतिहासिक ‘मैपिंग’ अभियान 🔴 देहरादून साइंस सिटी का भविष्य उजला: केंद्र सरकार ने स्वीकृत किए 14 करोड़ रुपये, सीएम धामी ने जताया आभार 🔴 देहरादून‑कालसी में सेना के ट्रक के ब्रेक फेल, अनियंत्रित होकर यूटिलिटी व चार महिलाओं को टक्कर 🔴 डीएवी पीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव पर कांग्रेस‑केंद्रित समन्वय समिति ने उठाए गंभीर सवाल 🔴 उत्तराखंड में नई दिशा: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मांगी परियोजनाओं की ‘जीवन-परिणाम’ की समीक्षा, केवल बजट खर्च पर नहीं बल्कि जनकल्याण पर होगी नजर
होम » खबरनामा » उत्तराखंड में मिलेट्स की सरकारी खरीद — 1 अक्टूबर से शुरू, मंडुवा की कीमत बढ़ी 52.05 रुपये/किलो

उत्तराखंड में मिलेट्स की सरकारी खरीद — 1 अक्टूबर से शुरू, मंडुवा की कीमत बढ़ी 52.05 रुपये/किलो

उत्तराखंड की पहाड़ी घाटियों में पारंपरिक खेती को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 1 अक्टूबर से मिलेट्स (मोटे अनाज) की बड़े पैमाने पर सरकारी खरीद शुरू कर दी है। यह पहल ‘उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ’ (UCF) के मिलेट्स मिशन योजना के अंतर्गत लागू होगी, जिसमें मंडुवा, झंगोरा, तिलहन, चौलाई और विभिन्न स्थानीय दालों जैसी पहाड़ी उपजें सीधे किसानों से खरीदी जाएँगी। इस वर्ष मंडुवा का समर्थन मूल्य 52.05 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया गया, जो पिछले वर्ष के 48.86 रुपये से और शुरुआती 18 रुपये से काफी अधिक है, जिससे किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि इस कदम से उत्तराखंड को पूरी तरह से ऑर्गेनिक राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में जैविक खेती की परंपरा पहले से ही मजबूत है।

खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज़ बनाने के लिए सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. इकबाल अहमद ने सभी जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा‑निर्देश जारी किए। उन्होंने बताया कि 250 खरीद केंद्रों की स्थापना की गई है, जो पिछले साल के 214 केंद्रों से 36 अधिक हैं, और सभी भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के माध्यम से किए जाएंगे। UCF के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ल ने कहा कि मंडुवा के अलावा सोयाबीन, झंगोरा, चौलाई और विभिन्न दालों की खरीद बाजार मूल्य के आधार पर ‘UCF हाट’ के ज़रिए होगी, साथ ही खरीदे गए अनाज की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रत्येक क्विंटल मंडुवा की खरीद पर संबंधित प्राथमिक सहकारी समिति को ₹200 का कमीशन भी दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण सहकारी संस्थाओं की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होगी।

वित्तीय वर्ष 2025‑26 में UCF ने 214 केंद्रों के माध्यम से 11,153 किसानों से कुल 53,860.652 क्विंटल मंडुवा खरीदा, जिसमें गढ़वाल मंडल में चमोली ने सबसे अधिक मंडुवा बेचा, टिहरी में सबसे अधिक किसान भागीदारी की, जबकि कुमाऊँ मंडल में पिथौरागढ़ ने कुल खरीद और किसान सहभागिता के मामले में शीर्ष स्थान पर रहा। इस साल केंद्रों की संख्या और समर्थन मूल्य में वृद्धि के साथ, सरकार को उम्मीद है कि अधिक किसान अपनी पारंपरिक फसलें बेचना चाहेंगे, जिससे उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी।

Original Title: पहाड़ की पारंपरिक फसलों को मिलेगा बाजार, 1 अक्टूबर से शुरू होगी सरकारी खरीद

Original Content: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पारंपरिक कृषि को बढ़ावा देने और किसानों को उनकी फसलों की सही कीमत दिलाने के मकसद से राज्य सरकार 1 अक्टूबर से बड़े पैमाने पर मिलेट्स (मोटे अनाज) की सरकारी खरीद शुरू करने जा रही है। यह खरीद ‘उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ’ (UCF) द्वारा राज्यभर में मिलेट्स मिशन योजना के तहत की जाएगी। योजना के अंतर्गत मंडुवा, झंगोरा, तिलहन, चौलाई और स्थानीय दालों जैसी पहाड़ी उपजों को सीधे किसानों से खरीदा जाएगा। 250 केंद्रों पर होगी खरीद, मंडुवा का दाम बढ़कर 52.05 रुपये प्रति किलो। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार की कोशिशों से पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक खेती को फिर से नई जिंदगी मिली है। जो किसान पहले मोटे अनाजों की खेती छोड़ चुके थे, वे अब दोबारा पारंपरिक खेती की तरफ लौट रहे हैं। सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को पूरी तरह से जैविक (ऑर्गेनिक) राज्य बनाना है। चूंकि पहाड़ी क्षेत्रों में जैविक खेती की परंपरा रही है, इसलिए किसानों के उत्पादों को बाजार में बेहतर अवसर मिल रहे हैं और आने वाले समय में जैविक उत्पादों की मांग और अधिक बढ़ने वाली है। मंत्री डॉ. रावत के मुताबिक, इस फसली वर्ष किसानों को राहत देने के लिए मंडुवे का खरीद मूल्य बढ़ाकर 52.05 रुपये प्रति किलो तय किया गया है। पिछले साल मंडुवा 48.86 रुपये प्रति किलो के भाव से खरीदा गया था। इससे पहले कभी यह दर मात्र 18 रुपये प्रति किलो हुआ करती थी। मंडुवे के सरकारी दाम में लगातार की जा रही बढ़ोतरी से स्थानीय किसानों की आय में सीधा इजाफा हो रहा है। 36 नए केंद्र खोले गए, डीबीटी से होगा किसानों का सीधे भुगतान। खरीद व्यवस्था को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. इकबाल अहमद ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि खरीद केंद्रों और तय कीमतों की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इस योजना का फायदा उठा सकें। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसानों को उनकी फसल का उचित दाम समय पर दिया जाए और भुगतान अनिवार्य रूप से सीधे उनके बैंक खातों में ‘डीबीटी’ (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से किया जाए। यूसीएफ के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ल ने बताया कि इस बार खरीद का दायरा बढ़ाते हुए कुल 250 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो पिछले साल के 214 केंद्रों के मुकाबले 36 अधिक हैं। उन्होंने बताया कि मंडुवे की खरीद 52.05रुपये प्रति किलो के न्यूनतम मूल्य पर होगी, जबकि सोयाबीन, झंगोरा, चौलाई और विभिन्न दालों की खरीद बाजार भाव के आधार पर ‘यूसीएफ हाट’ के जरिए की जाएगी। खरीदे गए पहाड़ी अनाजों की बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग की जाएगी ताकि उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों की राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान हो सके। इसके अलावा, प्रत्येक क्विंटल मंडुवे की खरीद पर संबंधित प्राथमिक सहकारी समिति को ₹200 का कमीशन मिलेगा, जिससे ग्रामीण सहकारी संस्थाएं भी आर्थिक रूप से मजबूत होंगी। पिछली बार 11 हजार से ज्यादा किसानों से हुई थी रिकॉर्ड खरीद। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में यूसीएफ ने 214 केंद्रों के माध्यम से कुल 11,153 किसानों से 53,860.652 क्विंटल मंडुवे की खरीद की थी। गढ़वाल मंडल की बात करें तो पिछले सत्र में चमोली जिला सबसे ज्यादा मंडुवा बेचने में अव्वल रहा, जबकि टिहरी जिले में सबसे अधिक संख्या में किसानों ने सरकारी केंद्रों पर अपनी उपज बेची। जबकि कुमाऊं मंडल में पिथौरागढ़ जिला कुल खरीद और किसानों की भागीदारी के मामले में सबसे आगे रहा। सरकार को उम्मीद है कि इस साल खरीद केंद्रों की संख्या और समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के कारण रिकॉर्ड संख्या में किसान अपने उत्पादों की बिक्री के लिए आगे आएंगे। Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।

संबंधित समाचार (Related News)