विश्व पर्यटन दिवस के उपलक्ष्य में उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने 24 अक्टूबर से 26 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले ‘आदि कैलाश परिक्रमा 2.0’ की घोषणा की। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम, जो आधी‑कैलाश और ॐ पर्वत क्षेत्र की अलौकिक सुंदरता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का लक्ष्य रखता है, राज्य के दूरस्थ पहाड़ी गाँवों को विश्व‑स्तरीय पर्यटन गंतव्य में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मंत्री ने बताया कि इस पहल के साथ साथ ‘आदि कैलाश परिक्रमा रन’ तथा ‘नीति वैली अल्ट्रा’ जैसे उच्च हिमालयी इवेंट्स ने पहले ही साबित कर दिया है कि सीमांत क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को सीधा लाभ पहुँचाया जा सकता है।
आदि कैलाश परिक्रमा 2.0 के बाद, नवंबर 2026 में आयोजित होने वाली ‘हिमालयन कार रैली’ को भी उत्तराखंड के साहसिक पर्यटन के विस्तार के रूप में उजागर किया गया। इस रैली के साथ ही, संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन (UN Tourism) ने इस वर्ष “डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से पर्यटन का नव‑निर्माण” को थीम घोषित किया है, और उत्तराखंड सरकार ने उसी दिशा में कदम बढ़ाए हैं। हाल ही में राज्य के 100 प्रमुख ट्रेकिंग मार्गों (50 गढ़वाल और 50 कुमाऊँ) की GPS एवं GIS मैपिंग के लिए टीमों को भेजा गया, जिससे एक मोबाइल ट्रेकिंग नेविगेशन ऐप और “द ट्रेक्स ऑफ उत्तराखंड” नामक कॉफ़ी‑टेबल बुक तैयार की जाएगी, जो ट्रेकर्स की सुरक्षा को बढ़ाएगी और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को आकर्षित करेगी।
पर्यटन के रोजगार‑सृजन पहल में, 6 000 से अधिक पंजीकृत होम‑स्टे अब युवा उद्यमियों को स्वरोजगार का अवसर प्रदान कर रहे हैं। राज्य को बारहमासी (All‑Weather) पर्यटन केंद्र बनाने के लिए शीतकालीन चारधाम यात्रा, स्नो‑ट्रेकिंग, एस्ट्रो‑टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। आगामी नवंबर में एकता नगर में ‘भारत पर्व’ तथा लंदन में ‘वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट’ के माध्यम से देवभूमि उत्तराखंड का संदेश विश्व स्तर पर पहुँचाने की तैयारी है।
अंत में, उत्तराखंड को “भारत की आध्यात्मिक राजधानी” बनाने के लिए शाक्त, शैव, वैष्णव, स्वामी विवेकानंद, नरसिंह, गोल्ज्यू, गुरुद्वारा, नवग्रह, नागराजा, हनुमान और महासू देवता आदि के विशेष धार्मिक सर्किट स्थापित किए जा रहे हैं। इन सर्किटों के साथ मिलकर आधी‑कैलाश परिक्रमा 2.0 उत्तराखंड के पर्यटन‑परिदृश्य को नई पहचान और वैश्विक मान्यता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Original Title: 24 अक्टूबर से आदि कैलाश परिक्रमा 2.0
Original Content: विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने ऐलान किया है कि 24 से 26 अक्टूबर तक ‘आदि कैलाश परिक्रमा 2.0’ का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन आदि कैलाश और ॐ पर्वत क्षेत्र की भव्यता और अलौकिक सुंदरता को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाएगा।
आदि कैलाश परिक्रमा 2.0 से सीमांत क्षेत्रों को नई पहचान
साहसिक पर्यटन को उत्तराखंड की मुख्य पहचान बताते हुए उन्होंने बताया कि ‘आदि कैलाश परिक्रमा रन’ और ‘नीति वैली अल्ट्रा’ जैसे उच्च हिमालयी आयोजनों ने यह साबित कर दिया है कि राज्य के दूरस्थ और सीमांत गांव भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्र बन सकते हैं। इन गतिविधियों का सीधा आर्थिक लाभ स्थानीय समुदायों को मिल रहा है। इसके साथ ही, नवंबर 2026 में होने वाली ‘हिमालयन कार रैली’ साहसिक पर्यटन के इस अभियान को और गति देगी।
डिजिटल तकनीक और आधुनिकता से पर्यटन का नव-निर्माण
मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन (UN Tourism) ने “डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से पर्यटन का नव-निर्माण” विषय तय किया है। उत्तराखंड सरकार इसी थीम पर काम कर रही है। हाल ही में राज्य के 100 प्रमुख ट्रेकिंग मार्गों (50 गढ़वाल और 50 कुमाऊं) की GPS और GIS मैपिंग के लिए टीमों को रवाना किया गया है। इसके आधार पर एक मोबाइल ट्रेकिंग नेविगेशन ऐप और “द ट्रेक्स ऑफ उत्तराखंड” कॉफी टेबल बुक तैयार की जाएगी, जिससे ट्रेकिंग अधिक सुरक्षित होगी और वैश्विक ट्रेकर्स आकर्षित होंगे।
रोजगार का साधन बनी होम स्टे योजना और बारहमासी पर्यटन
राज्य में 6,000 से अधिक पंजीकृत होम स्टे संचालित हो रहे हैं, जो युवाओं को स्वरोजगार प्रदान कर रहे हैं। राज्य को बारहमासी (All-Weather) पर्यटन केंद्र बनाने के लिए शीतकालीन चारधाम यात्रा, स्नो ट्रेकिंग, एस्ट्रो टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। आगामी नवंबर में एकता नगर के ‘भारत पर्व’ और लंदन के ‘वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट’ के जरिए देवभूमि का संदेश वैश्विक स्तर पर पहुंचाया जाएगा।
भारत की आध्यात्मिक राजधानी का रोडमैप
उत्तराखंड को “भारत की आध्यात्मिक राजधानी” बनाने के लिए शाक्त, शैव, वैष्णव, स्वामी विवेकानंद, नरसिंह, गोल्ज्यू, गुरुद्वारा, नवग्रह, नागराजा, हनुमान और महासू देवता जैसे विशेष धार्मिक सर्किट स्थापित किए गए हैं।
