उत्तराखंड कांग्रेस ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी के समय‑संदर्भ और अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नामों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल ने बताया कि उर्मिला ने पहले ही नार्को‑टेस्ट के लिये सहमति दे दी थी और अपने बयानों में दुष्यंत कुमार गौतम तथा उनके वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। फिर अगली पेशी से ठीक पहले पुलिस द्वारा उसकी गिरफ्तारी कर देना “असामान्य” और “जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला” कदम है, जिससे नार्को‑टेस्ट में देरी या बाधा उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने सीबीआई से अपील की कि बयानों, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पूरी जाँच की जाए तथा यदि किसी वीआईपी को दबाव या समझौता करने की कोशिश हुई हो तो उसकी स्वतंत्र जांच हो।
भंडारी केस के परिवार की पीड़ा को लेकर कांग्रेस ने भी आवाज़ उठाई। ज्योति रौतेला ने कहा कि अंकिता के माता‑पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिये “दर‑दर भटक” रहे हैं और इस मामले में सार्वजनिक आक्रोश को देखते हुए सरकार तथा जांच एजेंसियों को पारदर्शी जवाब देना आवश्यक है। उन्होंने मौजूदा और पुराने दोनों मुकदमों—पहले दर्ज शिकायत, गैर‑जमानती वारंट और वर्तमान में चल रहे केस—के कानूनी आधार को स्पष्ट करने की माँग की, ताकि परिवार को अनावश्यक इंतज़ार न करना पड़े।
कांग्रेस ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं: (1) नार्को‑टेस्ट की कानूनी प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति को सीबीआई और संबंधित अदालतों से स्पष्ट करना; (2) उर्मिला द्वारा लिये गये नामों और डिजिटल साक्ष्यों की निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करना; (3) गिरफ्तारी के समय‑संदर्भ पर उत्तराखंड पुलिस से विस्तृत स्पष्टीकरण माँगना; तथा (4) सोशल मीडिया से उर्मिला के बयानों को हटाने के प्रयास या किसी भी प्रकार के दबाव की स्वतंत्र जांच करवाना। इन मांगों के साथ कांग्रेस ने दोहराया कि कोई भी दबाव या समझौता न हो और सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के बाद ही न्याय संभव है।
अंत में, कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि अंकिता भंडारी के माता‑पिता को न्याय मिलने तक कोई भी कदम नहीं छूटना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों से अनुरोध किया कि केस की प्रगति की जानकारी नियमित रूप से परिवार को प्रदान की जाए, ताकि न्याय की प्रतीक्षा में परिवार को अनावश्यक कष्ट न सहना पड़े।
