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सहसपुर में रेशम उत्पादन की आधुनिक ट्रेनिंग, 34 प्रतिभागियों ने नई तकनीकों में महारत हासिल की

उत्तराखंड के सहसपुर में 21 से 25 अक्टूबर 2026 तक केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय और भारत सरकार के क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय प्रौद्योगिकी उन्मुखीकरण कार्यक्रम ने रेशम उत्पादन के विज्ञान को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया। इस कार्यक्रम में कुल 34 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया—देहरादून स्थित श्री गुरु राम राय कॉलेज के 19 उत्साही छात्र और रेशम निदेशालय, देहरादून द्वारा उत्तराखंड के विभिन्न राजकीय रेशम कार्यालयों से भेजे गए 15 अनुभवी कर्मचारी। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, नवीनतम अनुसंधान उपलब्धियों और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से प्रतिभागियों को परिचित कराकर उनकी तकनीकी दक्षता और कार्यक्षमता को सुदृढ़ बनाना था।

डॉ. साक्षी वैष्णव (वैज्ञानिक‑बी एवं प्रशिक्षण समन्वयक) और डॉ. अरसाकुमार ई. (वैज्ञानिक‑बी) ने केंद्र प्रमुख डॉ. पवन सैनी (वैज्ञानिक‑डी) के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का समन्वयन किया। पंजीकरण और प्रशिक्षण किट वितरण के साथ प्रारम्भ हुए सत्रों में रेशमकीट प्रजनन के सिद्धांत, शहतूत की खेती, बीज उत्पादन, विसंक्रमण, रोग पहचान और एकीकृत कृषि प्रणाली में रेशम की भूमिका पर विस्तृत व्याख्यान दिए गए। विशेषज्ञों ने अपने अनुसंधान अनुभव और क्षेत्रीय कार्यशैली को साझा कर छात्रों को रेशम उत्पादन में नवाचार और व्यावसायिक संभावनाओं की झलक दिखाई, जबकि रेशम निदेशालय के कर्मचारियों को उन्नत तकनीकों के कार्यान्वयन और किसानों तक उनके प्रसार के मार्गदर्शन प्रदान किया।

सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक सत्रों ने प्रतिभागियों को रेशम संग्रहालय की शैक्षणिक यात्रा, कोया शिल्प निर्माण, रेशमकीट पालन गृहों का विसंक्रमण, शहतूत रोपण एवं रखरखाव, तथा कोया नमूनाकरण‑सुखाने‑छँटाई जैसी प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अनुभव कराया। केंद्रीय रेशम बोर्ड और IIT रुड़की के संयुक्त सहयोग से स्थापित आदर्श रेशमकीट पालन गृह की यात्रा में नियंत्रित तापमान‑आर्द्रता वाले शरदकालीन रेशमकीट पालन की प्रगति देखी गई, जिससे आधुनिक गृह संरचना और पर्यावरणीय नियंत्रण के महत्व को समझा गया। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड को‑ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन लिमिटेड, प्रेमनगर के ग्रोथ सेंटर, सेलाकुई में कोसोत्तर प्रौद्योगिकी एवं रेशम धागा निकालने की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया गया, जिससे कोया उत्पादन से मूल्य संवर्धन तक की पूरी श्रृंखला स्पष्ट हुई।

कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने शहतूत खेती से लेकर रेशमकीट पालन, कोया उत्पादन और रेशम रीलिंग तक की संपूर्ण उत्पादन शृंखला पर गहन समझ प्राप्त की। अंतिम दिन फीडबैक सत्र में ज्ञान के क्षेत्रीय अनुप्रयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई, प्रमाण‑पत्र एवं स्मृति‑चिह्न वितरित किए गए और समूह फोटो खींचा गया। यह पहल न केवल छात्रों और रेशम निदेशालय के कर्मचारियों की वैज्ञानिक समझ को सुदृढ़ करती है, बल्कि केंद्रीय रेशम बोर्ड, शैक्षणिक संस्थानों और राज्य रेशम निदेशालय के बीच तकनीकी सहयोग को भी प्रोत्साहित करती है।

Original Title: सहसपुर में रेशम उत्पादन की आधुनिक ट्रेनिंग!, 34 प्रतिभागियों ने सीखी नई तकनीकें

Original Content: केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र, सहसपुर में 21 से 25 अक्टूबर 2026 तक पाँच दिवसीय प्रौद्योगिकी उन्मुखीकरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुल 34 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें श्री गुरु राम राय कॉलेज, देहरादून के 19 विद्यार्थी तथा रेशम निदेशालय, देहरादून द्वारा उत्तराखंड के विभिन्न राजकीय रेशम कार्यालयों से नामांकित 15 कर्मचारी शामिल थे।

सहसपुर में रेशम उत्पादन की आधुनिक ट्रेनिंग

कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को रेशम उत्पादन की आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, नवीनतम अनुसंधान उपलब्धियों और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से परिचित कराकर उनकी तकनीकी दक्षता एवं कार्यक्षमता को सुदृढ़ करना था।

कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. साक्षी वैष्णव, वैज्ञानिक-बी एवं प्रशिक्षण समन्वयक तथा डॉ. अरसाकुमार ई., वैज्ञानिक-बी ने केंद्र प्रमुख डॉ. पवन सैनी, वैज्ञानिक-डी के मार्गदर्शन में किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिभागियों के पंजीकरण और प्रशिक्षण किट वितरण के साथ हुआ।

तकनीकी जानकारी दी गई

पाँच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान रेशमकीट प्रजनन के सिद्धांत एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रेशम उत्पादन का परिचय, शहतूत की खेती एवं रोपण प्रबंधन, रेशमकीट पालन की वैज्ञानिक विधियां, गुणवत्तापूर्ण रेशमकीट बीज उत्पादन, मूल बीज फार्मों की भूमिका और रेशमकीट बीज उत्पादन की उन्नत तकनीकों पर व्याख्यान आयोजित किए गए।

इसके अतिरिक्त, रेशमकीट पालन गृहों एवं उपकरणों के विसंक्रमण, रेशमकीट और शहतूत की बीमारियों की पहचान, निदान एवं प्रबंधन, एकीकृत कृषि प्रणाली में रेशम उत्पादन की भूमिका और कोया गुणवत्ता के मूल्यांकन संबंधी तकनीकी जानकारी प्रदान की गई।

विशेषज्ञों ने अपने अनुसंधान अनुभव, वैज्ञानिक ज्ञान और क्षेत्रीय स्तर पर अर्जित व्यावहारिक अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए। इससे विद्यार्थियों को रेशम उत्पादन के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और व्यावसायिक संभावनाओं को समझने का अवसर मिला। वहीं, रेशम निदेशालय के कर्मचारियों को उन्नत तकनीकों के प्रभावी क्रियान्वयन, क्षेत्रीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान तथा किसानों तक नवीन तकनीकों के प्रसार के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

प्रतिभागियों को रेशम संग्रहालय का शैक्षणिक भ्रमण

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को रेशम संग्रहालय का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। साथ ही, कोया शिल्प निर्माण, रेशमकीट पालन गृहों एवं उपकरणों के विसंक्रमण, शहतूत पौधरोपण एवं रखरखाव, कोया नमूनाकरण, सुखाने, छँटाई एवं श्रेणीकरण तथा रेशमकीट बीज उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन किया गया।

शमकीट बीज उत्पादन और रोग प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों पर प्रशिक्षण

प्रतिभागियों ने केंद्रीय रेशम बोर्ड और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के संयुक्त अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग से स्थापित आदर्श एवं वहनीय रेशमकीट पालन गृह का भी भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने नियंत्रित तापमान एवं आर्द्रता की परिस्थितियों में संचालित पछेती शरदकालीन रेशमकीट पालन की गतिविधियों और प्रगति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्हें आधुनिक पालन गृह की संरचना, संचालन प्रणाली, पर्यावरणीय नियंत्रण व्यवस्था तथा वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों की जानकारी भी दी गई।

कोसोत्तर प्रौद्योगिकी से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रतिभागियों को उत्तराखंड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन लिमिटेड, प्रेमनगर के अंतर्गत संचालित ग्रोथ सेंटर, सेलाकुई का शैक्षणिक एवं तकनीकी भ्रमण कराया गया। यहाँ उन्होंने कोया प्रसंस्करण, रेशम धागा निकालने (रीलिंग) की प्रक्रिया तथा कोसोत्तर प्रौद्योगिकी से संबंधित गतिविधियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस भ्रमण से प्रतिभागियों को कोया उत्पादन से रेशम धागा निर्माण तक की तकनीकी प्रक्रियाओं और मूल्य संवर्धन के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम से वैज्ञानिक समझ

सैद्धांतिक व्याख्यानों, व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्रों और तकनीकी भ्रमणों के समन्वित आयोजन से प्रतिभागियों को शहतूत की खेती से लेकर रेशमकीट पालन, को

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।