उत्तराखंड की राजनीति ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही एक नया मोड़ लिया है, जब कांग्रेस ने अपने प्रमुख वरिष्ठ नेता रामशरण नौटियाल को वापस बुला लिया। 13 वर्ष बाद, यह कदम सिर्फ़ एक प्रतीकात्मक जीत नहीं, बल्कि पश्चिमी गढ़वाल के चार प्रमुख सीटों पर टिकट युद्ध की नई परतें खोल गया है। नौटियाल, जो पहले बीजेपी के दिग्गज थे, अब कांग्रेस के ढांचे में फिर से प्रवेश कर रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर गहरी असंतुष्टि और आंतरिक टकराव उत्पन्न हुआ है।
नौटियाल की वापसी से चकराता, सहसपुर, विकासनगर और यमुनोत्री सीटों पर राजनीतिक तापमान में तेज़ी आई है। 2022 के चुनाव में चकराता से बीजेपी के टिकट पर रामशरण ने चुनाव लड़े थे और कांग्रेस के प्रीतम सिंह ने उन्हें 9,436 वोटों से पराजित किया था। अब वही रामशरण कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, जिससे प्रीतम सिंह ने कड़े तिरस्कार के साथ कहा कि “राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर नौटियाल को पार्टी में लिया गया है, पर उन्हें अभी टिकट मांगने का अधिकार नहीं है।”
सहसपुर सीट पर पहले से ही आर्येंद्र शर्मा (रनर‑अप) और डॉ. हरक सिंह रावत के बीच टकराव चल रहा था। नौटियाल की उपस्थिति से इस क्षेत्र में टिकट के लिए संघर्ष और भी तीव्र हो गया है। वहीं विकासनगर में नवप्रभात की पारंपरिक सीट पर नौटियाल की उपस्थिति ने भी सवालों के घेरे को बढ़ा दिया है।
यमुनोत्री सीट, जहाँ 2022 में निर्दलीय संजय डोभाल ने जीत दर्ज की थी और कांग्रेस का दीपक बिजल्वाण दूसरे स्थान पर रहे थे, अब नौटियाल के लिए एकमात्र संभावित आश्रय बन गया है। दीपक बिजल्वाण के भाजपा में शामिल होने के बाद यह सीट उनके लिए खुली हुई लगती है।
कांग्रेस के भीतर की यह नई गतिशीलता केवल 2027 के चुनाव तक सीमित नहीं है। चर्चाएँ चल रही हैं कि रामशरण नौटियाल 2029 के लोकसभा चुनाव में अपने बेटे जुबिन नौटियाल के लिए टिहरी गढ़वाल सीट पर कांग्रेस का टिकट सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पार्टी में लौटे हैं। कांग्रेस हाईकमान को अब यह तय करना है कि नौटियाल को किस भूमिका में आगे बढ़ाया जाए और इस “टिकट के रण” को कैसे शांत किया जाए।
Original Title: कांग्रेस की शरण में रामशरण, छिड़ गया टिकट का रण!
Original Content: उत्तराखंड की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ही शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। राज्य की राजनीति में नेताओं के पाला बदलने के दौर के बीच कांग्रेस ने बीजेपी को एक बड़ा झटका दिया है। मशहूर पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल के पिता और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रामशरण नौटियाल ने करीब 13 साल बाद एक बार फिर कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। भले की नौटियाल की आमद को कांग्रेस ने अपनी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया हो मगर असलियत तो चकराता, विकासनगर, सहसपुर के कांग्रेस के विधायक और उम्मीदवार ही जानते हैं,जो उनके आने से असहज हो गए हैं।
नौटियाल की एंट्री के बाद कांग्रेस में पैदा हुई तनातनी
रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी ने पश्चिमी गढ़वाल की चार प्रमुख विधानसभा सीटों का राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ा दिया है। नौटियाल का इन चारों सीटों पर खासा प्रभाव माना जाता है। लेकिन उनके पार्टी में कदम रखते ही कांग्रेस के भीतर गदर मच गया है । खासकर तीन सीटों में 2027 के टिकट के दावेदारों के बीच ‘टिकट का रण’ छिड़ गया है।नौटियाल की एंट्री के बाद कांग्रेस में पैदा हुई तनातनी को समझने के लिए इन चारों सीटों के 2022 विधानसभा चुनाव परिणामों और राजनीतिक स्थिति पर नजर डालना जरूरी है। वजह है रामशरण नौटियाल के आने से इन विधानसभा क्षेत्रों के समीकरण पूरी तरह से उलट-पुलट जाना।
चकराता सीट पुरानी दुश्मनी या नया मोर्चा
2022 में बीजेपी के टिकट पर रामशरण नौटियाल खुद चकराता से चुनाव लड़े थे, जहाँ कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रीतम सिंह ने उन्हें 9,436 वोटों से शिकस्त दी थी। अब नौटियाल उसी कांग्रेस में आ गए हैं। चकराता से विधायक और चुनाव कैंपेन समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने उनके आते ही कड़े तेवर दिखाए हैं। प्रीतम सिंह ने साफ लहजे में कहा, “राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर नौटियाल को पार्टी में लिया गया है, लेकिन नेतृत्व ने यह भी साफ कर दिया है कि जो नया व्यक्ति शामिल हुआ है, उसे फिलहाल टिकट मांगने का कोई अधिकार नहीं है।”
सहसपुर सीट में होगी दिग्गजों में जंग
सहसपुर सीट पर पहले से ही कांग्रेस के दो कद्दावर नेता हैं। आर्येंद्र शर्मा 2022 में रनर-अप रहे थे। वहीं डॉ. हरक सिंह रावत अपनी-अपनी मजबूत दावेदारी ठोक रहे हैं। ऐसे में अगर नौटियाल यहाँ नजर गड़ाते हैं, तो कांग्रेस के भीतर टिकट के लिए घमासान मचना तय है।
विकासनगर में नवप्रभात की बिगड़ेगी बिसात
विकासनगर सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवप्रभात की पारंपिरक सीट रही है। भले ही वे वहांसे चुनाव हारे हों मगर अब लगातार चुनावी तैयारी में जुटे हैं और 2027 में वापसी की राह देख रहे हैं। नौटियाल की उपस्थिति से इस सीट के समीकरणों में भी संशय के बादल छा गए हैं।
अब यमुनोत्री सीट ही एकमात्र उम्मीद ?
2022 में यमुनोत्री सीट से निर्दलीय संजय डोभाल जीते थे और कांग्रेस के दीपक बिजल्वाण दूसरे स्थान पर रहे थे। सवाल उठ रहा है कि जब बाकी तीन सीटों पर पेंच फंसा है, तो क्या नौटियाल यमुनोत्री से किस्मत आजमाएंगे । इसकी वजह है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में हारने के बाद में दीपक बिजल्वाण भाजपा में शामिल हो गए और पार्टी में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। ऐसे में यमुनोेत्री ही नौटियाल की एक मात्र उम्मीद बनती है।
क्या 2029 के ‘टिहरी के रण’ का भी है मास्टर प्लान ?
चर्चाओं का बाजार इस बात को लेकर भी गर्म है कि रामशरण नौटियाल की निगाहें केवल 2027 के विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह 2029 के लोकसभा चुनाव में अपने लोकप्रिय पार्श्व गायक बेटे जुबिन नौटियाल के लिए टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट से कांग्रेस का टिकट पक्का करने की दूरगामी रणनीति के तहत पार्टी में लौटे हैं। फिलहाल, नौटियाल के आने से कांग्रेस में नए-पुराने नेताओं के बीच अंदरूनी खींचतान और टिकट पाने की होड़ तेज हो गई है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि कांग्रेस हाईकमान रामशरण नौटियाल को किस राजनीतिक भूमिका में आगे बढ़ाता है और अपनी ही पार्टी में छिड़े इस ‘टिकट के रण’ को कैसे शांत करता है।
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