उत्तराखंड पुलिस के इतिहास में एक नया और गर्व का पन्ना जुड़ने वाला है, क्योंकि राज्य की खाकी फोर्स को देश के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान, ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ (President’s Police Colour) से नवाजा जाने वाला है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल पुलिस बल के लिए एक मानसिक ऊंचाई है, बल्कि यह विभाग की साख और देश सेवा में किए गए योगदान का प्रतीक भी है। इस बड़े बदलाव के साथ, उत्तराखंड पुलिस अपनी पुरानी पहचान को अलविदा कहकर एक नया, आकर्षक और अधिक संस्थागत रूप अपनाने जा रही है। इसका असर जवानों की वर्दी से लेकर थानों और पुलिस मुख्यालय पर लगे झंडों तक दिखाई देगा, जिससे पुलिस बल का समग्र रूप और अधिक दृढ़ और आधुनिक नजर आएगा।
इस ऐतिहासिक अवसर का जश्न 6 नवंबर को मनाया जाएगा, जो राज्य के स्थापना दिवस (9 नवंबर) से कुछ दिन पहले पड़ रहा है। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देहरादून का दौरा करेंगे और उत्तराखंड पुलिस को यह प्रतिष्ठित ध्वज औपचारिक रूप से सौंपेंगे। ध्वज के अनावरण के तुरंत बाद, पुलिस का आधिकारिक झंडा नए रंग और डिजाइन के साथ फहराने लगेगा, जो राज्य की पुलिस सेवाओं की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक बनेगा। यह दिन न केवल सम्मान का होगा, बल्कि यह पूर्ण रूप से एक नई शुरुआत का प्रतीक भी होगा, जहां पुरानी प्रथाओं की जगह नए मानदंडों को अपनाया जाएगा।
वर्दी में होने वाले बदलावों की बात करें तो, उत्तराखंड पुलिस अब उत्तर प्रदेश पुलिस की तर्ज पर सीने पर एक विशेष बैज (Badge) का प्रयोग करेगी। वर्तमान में, जवानों की बाईं बाजू पर एक गोल मोनोग्राम लगा होता है, जिसे साल 2021 में पूर्व डीजीपी अशोक कुमार के कार्यकाल में शुरू किया गया था। अब इस मौजूदा मोनोग्राम को और बेहतर बनाया जा रहा है, जबकि नए बैज और इंसिगनिया (Insignia) के माध्यम से दूर से ही जवानों का पद और विभागीय पहचान स्पष्ट रूप से जाहिर होगी। टोपी, सीने और बाजू पर लगने वाले सभी निशान नए रूप में नजर आएंगे, जिससे पुलिस बल का लुक और भी समन्वित और प्रभावशाली होगा।
इतने व्यापक बदलावों के लिए विभाग को महत्वपूर्ण वित्तीय संसाधन खर्च करने होंगे। अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस पूरे मेकओवर पर विभाग की जेब पर लगभग 4 से 5 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। इस राशि में IPS अफसरों के दफ्तरों, सभी सरकारी इमारतों और थानों पर लगे पुराने झंडों को हटाकर नए डिजाइन वाले ध्वज लगाना शामिल है। इसके अलावा, पुलिसकर्मियों को अपने लिए नए बैच वाली वर्दियां खरीदने की भी आवश्यकता होगी। हालांकि, यह वित्तीय निवेश लंबे समय की सफलता और विभाग की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए आवश्यक माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, यह बदलाव केवल सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि विभागीय एकजुटता और पहचान को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। दीपावली और राज्य स्थापना दिवस के इस खास मौके पर, जब उत्तराखंड पुलिस इस नए कलेवर में सड़कों पर उतरेगी, तो उनकी यह ‘स्मार्ट और नई लुक’ न केवल नागरिकों का ध्यान खींचेगी, बल्कि यह पुलिस सेवाओं के प्रति समर्पण का एक प्रतीक भी बनेगी। यह नई पहचान राज्य के सुरक्षा अभियान में एक नया आयाम जोड़ेगी और पुलिस-जनता संबंधों को और भी गहराई से जोड़ेगा।
