कानून के वरिष्ठ रक्षक जब खुद ही न्याय की दुकान चला बैठते हैं, तो आम नागरिक इंसाफ के लिए कहां जाए? उत्तराखंड के रुड़की जिले के गंगनहर कोतवाली क्षेत्र से एक ऐसा ही चौंकाने वाला और बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस विभाग के दो पूर्व दरोगाओं (सब-इंस्पेक्टरों) पर मुकदमे में ‘फाइनल रिपोर्ट’ (FR) लगाने के बहाने लाखों रुपये की रिश्वत वसूली और डराने-धमकाने का आरोप लगने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Anti-Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह घटना पुलिस इमेज के लिए न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह इस बात का दमदार सबूत है कि अगर नागरिक जागरूक हों और ठोस सबूत रखें, तो कोई भी अधिकारी अपनी गलतियों को छुपा नहीं सकता।
मामले की शुरुआत 5 जुलाई 2023 को हुई, जब गंगनहर कोतवाली में सुषमा सैनी ने बागपत (उत्तर प्रदेश) के निरपुड़ा गांव के निश्चय राणा और नितीश राणा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कराया। इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच की जिम्मेदारी तत्कालीन उपनिरीक्षक मनदीप सिंह को दी गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विवेचना के दौरान मनदीप सिंह के ईमान में दरार पड़ गई और उन्होंने केस को हमेशा के लिए बंद करने के बदले 3.50 लाख रुपये की मोटी रकम वसूली। पैसे मिलने के बाद 6 जून 2024 को फाइल पर फाइनल रिपोर्ट लगाकर कोर्ट में भेजी गई, जिससे मामला बंद कर दिया गया।
हालांकि, कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जब किसी कारणवश इस मामले की दोबारा विवेचना (Re-investigation) का आदेश जारी हुआ, तो केस की फाइल गंगनहर कोतवाली के एक अन्य तत्कालीन उपनिरीक्षक बलवंत पवार के पास पहुंची। आरोप है कि पवार ने भी इसी पुरानी फाइल में दोबारा से FR लगाने के लिए नया ‘रेट कार्ड’ तय किया और इस बार 5 लाख रुपये की डिमांड रख दी। जब शिकायतकर्ता ने इतनी बड़ी रकम दोबारा देने से इनकार कर दिया, तो दरोगाओं ने धमकियां देनी शुरू कर दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें खूलेआम धमकाया गया कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो उन्हें गोली मार दिया जाएगा, झूठे मुकदमों में फंसा दिया जाएगा और सलाखों के पीछे सड़ा दिया जाएगा।
इस ताने-बाने में फंसे शिकायतकर्ता ने हार मानने के बजाय चालाकी से काम लिया और दरोगाओं के काले कारनामों की ऑडियो व वीडियो रिकॉर्डिंग तैयार कर ली। इसके बाद, जब सीधे पुलिस के आलाधिकारियों का दरवाजा खटखटाया गया और सबूत पेश किए गए, तो मामला दबाना मुमकिन नहीं रहा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए SP देहात को तुरंत निष्पक्ष जांच के आदेश दिए। SP देहात ने ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और पूरे मामले की बारीकी से पड़ताल की, जिससे मनदीप सिंह और बलवंत पवार की भूमिका और उनकी काली करतूतों की कलई खुल गई।
जांच रिपोर्ट आते ही गंगनहर कोतवाली में दोनों पूर्व दरोगाओं के खिलाफ भ्रष्टाचार की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पुलिस प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और वैधानिक कार्रवाई तेजी से की जा रही है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो, अगर जनता जागरूक हो और सबूतों के साथ आवाज उठाए, तो ‘खाकी’ की आड़ में छिपे भ्रष्ट अधिकारियों का बचना नामुमकिन हो जाता है।
