उत्तराखंड के राजनीति गलियारों में एक बार फिर चर्चा का विषय बनी गैरसैंण विधानसभा सत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस की ओर से सत्र के बाहर घेराव और प्रदर्शन की घोषणा को ‘नकारात्मक राजनीति’ की किताब में जोड़ा गया एक और काला अध्याय बताया गया है। भट्ट ने मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस के इस रुख पर तीखे शब्दों में हमला बोलते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों से कांग्रेस का मूड और रवैया अपरिवर्तित है। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्षी दल सदन के बाहर घेराव और अंदर हंगामे करके अपना पूरा समय बर्बाद कर रहे हैं, जबकि जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा की बजाय वे केवल शोर मचाने में लगे रहते हैं।
महेंद्र भट्ट ने विधानसभा को लोकतंत्र का सर्वोच्य मंच बताते हुए यह दलील प्रस्तुत की कि यहाँ जनप्रतिनिधियों का मुख्य कर्तव्य अपनी-अपनी संसदीय क्षेत्र की समस्याओं और जनता के हित को लेकर चर्चा करना होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान कार्यकाल में भी ऐसा कोई अवसर नहीं रहा जब विपक्ष ने सत्र की शुरुआत घेराव या प्रदर्शन के बिना की हो। भट्ट का यह भी कहना है कि विपक्षी नेता और विधायक जनता के बीच नहीं रहते, बल्कि वे राजनीति को चमकाने के लिए हंगामे के नए-नए अवसरों की तलाश में रहते हैं। उनका मानना है कि ये विधायक जनता के बीच नहीं जाते, बल्कि केवल शोर मचाकर अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने का प्रयास करते हैं।
पिछले पांच वर्षों के इतिहास का हवाला देते हुए भट्ट ने यह भी आरोप लगाया कि सदन के अंदर भी विपक्ष का पूरा ध्यान हंगामा करने में लगा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जनता यह साक्षी है कि विपक्षी विधायकों ने न तो जनहित के मुद्दे उठाए और न ही क्षेत्रीय समस्याओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का प्रयास किया। इसके विपरीत, जब सत्ता पक्ष या सरकार द्वारा किसी महत्वपूर्ण विधेयक या जनहित के मुद्दे पर गंभीर चर्चा होती है, तब भी विपक्ष ध्यान भटकाने और विषय को लटकाने के लिए शोर-शराबा करता है। भट्ट ने यह भी उल्लेख किया कि कांग्रेस समेत विपक्ष के कई विधायकों को सदन में अक्सर अराजकता और हुड़दंग करते हुए देखा गया है, यहाँ तक कि सदन के अंदर दिन भर हंगामा और रात को कंबल ओढ़कर सोने का अनोखा रिकॉर्ड भी उत्तराखंड के विपक्ष के नाम दर्ज है।
अंत में, महेंद्र भट्ट ने विपक्ष से आग्रह किया है कि यह आखिरी सत्र है, इसलिए प्रदेश के विकास और कल्याण के लिए इसे सफल और जनलाभकारी बनाना सभी का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कांग्रेस से अनुरोध किया है कि वे पुराने अनुभवों को भूलकर इस सत्र का अधिकतम उपयोग जनहित के लिए करें और अपनी घेराव की घोषणा पर पुनर्विचार करें। भट्ट ने अपने विधान को खत्म करते हुए एक व्यंग्यपूर्वक टिप्पणी करते हुए कहा, “व्यवस्था सार्वजनिक है और जनता सब कुछ पहचानती है कि सदन के अंदर क्या हो रहा है और बाहर क्या चल रहा है।” इस बयान के माध्यम से भाजपा ने कांग्रेस को न केवल असंवेदनशील, बल्कि उद्देश्यहीन राजनीति का अभियंता बताकर अपनी सत्ता चालू रखने के अपने प्रयासों को सही ठहराने की कोशिश की है।
