उत्तराखंड के देहरादून जिले के अजबपुर में साइलेज फेडरेशन के नए कार्यालय का भव्य उद्घाटन हुआ, जहाँ सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने “मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना” को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का ऐलान किया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 10,000 से अधिक महिलाओं को अब भारी-भरकम घास के गट्ठर जंगल से लाने की झंझट से मुक्ति मिल गई है, जिससे उनका समय और परिश्रम दोनों बच रहे हैं।
साइलेज फेडरेशन के अध्यक्ष हर्षुल वर्मा, प्रबंध निदेशक मोनिका चुनेरा, संयुक्त निबंधक रविंद्री मंदरवाल और महाप्रबंधक सुमन कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारियों ने समारोह में भाग लिया। डॉ. रावत ने फेडरेशन को अगले वर्ष के भीतर 1 बिलियन रुपये का टर्नओवर हासिल करने का लक्ष्य दिया, जो 2019 में 3.5 करोड़ रुपये के कर्ज से शुरू हुए परियोजना के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है।
यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने का साधन बन चुकी है। मक्का उगाने वाले किसानों को अब अपनी फसल बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती; साइलेज फेडरेशन सीधे उनकी उपज खरीद लेता है। पशुपालकों को पैकेज्ड, न्यूट्रिशियस हरा चारा (साइलेज) सीधे मिल रहा है, जिससे उनकी मवेशियों की पोषण स्थिति में सुधार हुआ है।
डॉ. रावत ने बताया कि 2019 में जब परियोजना शुरू हुई थी, तब केवल 375 मक्का किसान जुड़े थे और 3.5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था। आज फेडरेशन का टर्नओवर 50 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, और मक्का किसानों की जेब में 15 करोड़ रुपये से अधिक का सीधा भुगतान पहुँच चुका है। 2,500 से अधिक किसान और 10,000 से अधिक महिलाएँ इस योजना से प्रत्यक्ष लाभ उठा रही हैं। सहकारी समितियों (M‑PACs) को 2.7 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी वितरित की जा चुकी है।
भविष्य के लिए डॉ. रावत ने “टोटल मिक्स्ड राशन” (TMR) यूनिट के शुभारम्भ की घोषणा की है, जिससे पशुओं के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार पैकेज तैयार किया जाएगा। यह पहल दूध उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। अब तक पशुपालकों को 80 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी और अनुदान मिल चुका है, जो उनके आर्थिक बोझ को हल्का करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
Original Title: हजारों महिलाओं को जंगल के खतरों से मिली मुक्ति ! घस्यारी योजना से जुड़ा 100 करोड़ का प्लान
Original Content: उत्तराखंड के गांवों में रहने वाली महिलाओं के लिए एक बड़ी और खुश कर देने वाली खबर है। अब उन्हें मवेशियों (पशुओं) के लिए घास-चारा जुटाने के लिए जंगलों के चक्कर और हादसों के खतरे नहीं उठाने पड़ेंगे। सूबे के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने ‘मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना’ को और बड़ा रूप देने का धमाकेदार ऐलान किया है। साइलेज फेडरेशन के नए दफ्तर का उद्घाटन। देहरादून के अजबपुर में साइलेज फेडरेशन के नए दफ्तर का उद्घाटन करते हुए सहकारिता मंत्री ने फेडरेशन को अगले एक साल के भीतर 100 करोड़ रुपये का टर्नओवर (कारोबार) हासिल करने का बड़ा टारगेट थमा दिया है। अजबपुर दफ्तर के उद्घाटन समारोह में साइलेज फेडरेशन के अध्यक्ष हर्षुल वर्मा, प्रबंध निदेशक मोनिका चुनेरा, संयुक्त निबंधक रविंद्री मंदरवाल, महाप्रबंधक सुमन कुमार समेत सहकारिता विभाग के कई बड़े अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। क्या है इस योजना के फायदे ? मंत्री डॉ.धन सिंह का दावा है कि यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि गांव-घर की किस्मत बदलने का जरिया बन चुकी है। राज्य की 10,000 से अधिक महिलाओं को अब सिर पर भारी-भरकम घास का गट्ठर लादकर जंगल से नहीं लाना पड़ रहा। इससे उनका समय और मेहनत दोनों बच रही हैं। मक्का उगाने वाले किसानों को अब अपनी फसल बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ता। सीधे साइलेज फेडरेशन उनकी उपज खरीद लेता है। पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए पैकेज्ड, न्यूट्रिशियस हरा चारा (साइलेज) सीधे मिल रहा है। साढ़े तीन करोड़ से शुरू सफर, अब 50 करोड़ के पार! डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि साल 2019 में जब यह काम शुरू हुआ था, तब महज 3.50 करोड़ रुपये का लोन लिया गया था और सिर्फ 375 मक्का किसान जुड़े थे।लेकिन आज कहानी बदल चुकी है। साइलेज फेडरेशन 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का टर्नओवर हासिल कर चुका है। मक्का किसानों की जेब में अब तक 15 करोड़ रुपये से ज्यादा का सीधा पेमेंट पहुंच चुका है। 2,500 से अधिक किसान और 10,000 से ज्यादा महिलाएं योजना से सीधे फायदा उठा रही हैं। गांवों तक चारा पहुंचाने वाली सहकारी समितियों (M-PACS) को भी प्रोत्साहन राशि के रूप में 2.70 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। पशुओं को मिलेगा ‘टोटल मिक्स्ड राशन’ (TMR), बढ़ेगा दूध का उत्पादन! डॉ. धन सिंह रावत के मुताबिक पशुपालकों के लिए जल्द ही TMR (टोटल मिक्स्ड राशन) यूनिट चालू की जाएगी। सीधे कहें तो जैसे इंसानों के लिए एक बैलेंस डाइट थाली होती है, वैसे ही पशुओं के लिए भी पौष्टिक और संतुलित आहार की स्पेशल पैकिंग तैयार होगी। इससे चारे की किल्लत दूर होगी, मवेशी तंदुरुस्त रहेंगे और दूध का उत्पादन व क्वालिटी दोनों शानदार होंगे! अब तक पशुपालकों की मदद के लिए 80 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी (अनुदान) दे चुकी है। Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.
