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उत्तराखंड बना पांचवां राज्य, गुटखा‑पान मसाला पर एक साल का प्रतिबंध

उत्तराखंड सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से गुटखा, पान मसाला और अन्य तंबाकू‑युक्त उत्पादों पर एक साल के लिए प्रतिबंध लागू किया है। इस कदम का मुख्य लक्ष्य युवाओं और किशोरों को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों से बचाना, साथ ही मौखिक कैंसर, लार ग्रंथि रोग और दंत‑मसूड़े संबंधी समस्याओं की दर को घटाना है। राज्य ने इस प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए बिक्री‑वितरण पर कड़ी निगरानी, उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और व्यापक जागरूकता अभियान की योजना भी तैयार की है।

यह प्रतिबंध उत्तराखंड को भारत के पाँचवें ऐसे राज्य के रूप में स्थापित करता है, जिन्होंने गुटखा‑पान मसाला पर प्रतिबंध लगाया है। इस क्रम में पहले ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र और कर्नाटक ने समान कदम उठाया था। सभी राज्यों ने समान कारणों को उजागर किया है: तंबाकू में मौजूद निकोटीन की लत, मुँह‑गले के कैंसर का बढ़ता जोखिम और आर्थिक बोझ, जो न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गुटखा और तंबाकू‑युक्त पान मसाले का निरंतर सेवन केवल कैंसर नहीं, बल्कि मुँह खोलने में कठिनाई, खाने‑पीने में बाधा और सामाजिक‑व्यावसायिक कार्यों में कमी का कारण बनता है। इन जोखिमों से निपटने के लिए सरकार ने स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने का इरादा जताया है, जहाँ युवा वर्ग को तंबाकू के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। साथ ही, तंबाकू की लत छोड़ने के इच्छुक लोगों को परामर्श एवं नशामुक्ति सेवाएँ उपलब्ध कराना भी नीति का अभिन्न हिस्सा होगा।

नियमों के सफल कार्यान्वयन के लिए राज्य ने बिक्री बिंदुओं की नियमित जाँच, अनधिकृत स्टॉक्स की बरामदगी और उल्लंघनकर्ताओं पर जुर्माना या लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया तय की है। अधिकारियों का मानना है कि प्रतिबंध, जागरूकता और उपचार सुविधाओं के समन्वित प्रयास से तंबाकू के सेवन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में दीर्घकालिक सुधार संभव हो सकेगा।

Original Title: गुटखा-पान मसाले पर प्रतिबंध लगाने वाला पांचवां राज्य बना उत्तराखंड, जानें बाकी राज्यों के नाम

Original Content: Uttarakhand News | Tobacco Ban | Public Health : उत्तराखंड सरकार ने गुटखा, पान मसाला और तंबाकूयुक्त उत्पादों पर प्रतिबंध लगाकर जनस्वास्थ्य की दिशा में कदम उठाया है। इस फैसले का मकसद लोगों, खासकर युवाओं और किशोरों को तंबाकू के नुकसान से बचाना है। राज्य में यह प्रतिबंध एक साल के लिए लागू किया गया है।
इस साल तंबाकूयुक्त उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने वाले राज्यों में उत्तराखंड भी शामिल हो गया है। इससे पहले ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी ऐसे प्रतिबंध लगाए गए है।
गुटखा और तंबाकूयुक्त पान मसाले का सेवन मुंह और गले के कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। इससे दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। लंबे समय तक सेवन करने से मुंह खोलने में परेशानी भी हो सकती है…जिससे खाना खाने और रोजमर्रा के कामों पर असर पड़ता है।
तंबाकू में मौजूद निकोटीन की लत लग सकती है। यही वजह है कि नियमित सेवन करने वाले लोगों के लिए इसे छोड़ना मुश्किल हो जाता है। तंबाकू से होने वाली बीमारियों का असर व्यक्ति के साथ उसके परिवार पर भी पड़ता है। इलाज का खर्च बढ़ने और काम करने की क्षमता प्रभावित होने से आर्थिक परेशानियां भी पैदा हो सकती हैं।
तंबाकूयुक्त उत्पादों पर प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए नियमों का पालन कराना जरूरी है। इसके लिए बिक्री और वितरण पर निगरानी रखनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ लोगों को जागरूक करना भी अहम होगा।
स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में जागरूकता अभियान चलाकर बच्चों और युवाओं को तंबाकू के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जा सकती है। वहीं तंबाकू की लत छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों को परामर्श और नशामुक्ति सेवाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
प्रतिबंध के साथ जागरूकता, नियमित निगरानी और उपचार की सुविधाओं पर ध्यान देने से तंबाकू के सेवन को कम करने में मदद मिल सकती है।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।