उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के उद्देश्य से एक नई सुरक्षा व्यवस्था की घोषणा की है, जिसमें सरकारी दफ़्तरों, स्कूल‑कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में ‘नो हेलमेट, नो एंट्री’ का नियम लागू किया जाएगा। इस दिशा‑निर्देश के तहत दोपहिया वाहन से आने वाले सभी व्यक्तियों को हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा, साथ ही बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन बीमा के किसी भी संस्थान में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह कदम राज्य के सख्त रोड‑सेफ़्टी प्रोटोकॉल का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं में भारी गिरावट लाना है।
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने सोमवार को देहरादून के होटल ताज में अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने सभी जिलों को ‘ज़ीरो फ़ैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट’ बनाने के लिए केंद्र के मानकों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। इस योजना के तहत प्रत्येक परिवहन कार्यालय में स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक स्थापित किए जाएंगे, जिससे लाइसेंस जारी करने से पहले कंप्यूटर‑आधारित परीक्षा को अनिवार्य किया जाएगा। यह तकनीकी उपाय लाइसेंसधारकों की योग्यताओं को सटीक रूप से परखने में मदद करेगा।
बैठक में इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा और आपात‑चिकित्सा विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया गया। चारधाम यात्रा मार्गों पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों की अतिरिक्त स्थापना का आदेश दिया गया, जिससे न केवल ट्रैफ़िक उल्लंघन बल्कि मोटर वाहन अधिनियम के अन्य उल्लंघनों पर भी त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी। साथ ही, कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत इन मार्गों पर ट्रॉमा सेंटर और वाहन चालकों के लिए विश्राम गृह निर्माण की संभावना पर भी चर्चा हुई।
इन उपायों की तात्पर्य उत्तराखंड में हालिया दुर्घटना आंकड़ों से स्पष्ट है: जनवरी से अगस्त 2026 के बीच राज्य में 1,480 सड़क दुर्घटनाएँ दर्ज हुईं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 1,289 मामलों की तुलना में 14.8 प्रतिशत अधिक हैं। इस बढ़ते जोखिम को देखते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्धन, परिवहन आयुक्त रविनाथ रामन, वित्त सचिव रणवीर सिंह चौहान, निदेशक यातायात कृष्ण कुमार और कई अन्य उच्च अधिकारी इस बैठक में उपस्थित रहे, जो इस नई नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता का संकेत देते हैं।
Original Title: हेलमेट नहीं तो एंट्री नहीं! स्कूल-कॉलेज से सरकारी दफ्तर तक लागू होगी ये नई व्यवस्था
Original Content: Road Safety | Helmet Rule | Uttarakhand : उत्तराखंड में बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए अब सड़क सुरक्षा नियमों के पालन पर और जोर दिया जाएगा। इसके तहत सरकारी कार्यालयों, स्कूल-कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में ‘नो हेलमेट, नो एंट्री’ व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। यानी दोपहिया वाहन से आने वाले लोगों के लिए हेलमेट जरूरी होगा। इसके साथ ही बिना ड्राइविंग लाइसेंस और बिना वाहन बीमा के भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
देहरादून के होटल ताज में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने सड़क सुरक्षा को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने प्रदेश के सभी जिलों को जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट बनाने की दिशा में केंद्र के मानकों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी परिवहन कार्यालयों में स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक जल्द स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से पहले आवेदकों की कंप्यूटर आधारित परीक्षा सुनिश्चित करना है।
बैठक में सड़क हादसों को कम करने के लिए इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा और आपात चिकित्सा व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया गया।
चारधाम यात्रा मार्गों पर यातायात नियमों की निगरानी बढ़ाने के लिए ANPR यानी ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। पहले से लगे कैमरों से सामने आने वाले यातायात उल्लंघनों के साथ मोटर वाहन कानून के अन्य उल्लंघनों पर भी कार्रवाई करने को कहा गया है।
इसके अलावा चारधाम मार्गों पर कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व यानी CSR के तहत ट्रॉमा सेंटर और वाहन चालकों के लिए विश्राम गृह बनाने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सड़क हादसों के आंकड़ों को देखते हुए यह कदम अहम माना जा रहा है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच उत्तराखंड में 1480 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जो पिछले साल की इसी अवधि के 1289 मामलों की तुलना में 14.8 प्रतिशत अधिक हैं।
बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, परिवहन आयुक्त रविनाथ रामन, सचिव वित्त रणवीर सिंह चौहान, निदेशक यातायात कृष्ण कुमार समेत परिवहन और यातायात विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।
