उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद सामने आई फाइनल मतदाता सूची ने राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। नई सूची के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं आमंत्रित हो गई हैं। आंकड़ों की गहन तलाश से पता चलता है कि SIR प्रक्रिया के बाद उत्तराखंड में करीब 13.95 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जबकि इसी दौरान केवल 1.29 लाख नए मतदाताओं को रजिस्टर किया गया है। इस कटौती से प्रदेश की कुल मतदाता संख्या 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान दर्ज 84,31,101 से घटकर अब 71,58,949 रह गई है। इस बड़े पैमाने पर हुए बदलाव ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह कमी आगामी चुनावों के नतीजों को प्रभावित कर सकती है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों में से 69 सीटों पर मतदाताओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, देहरादून जिले की कई प्रमुख सीटों, जैसे धर्मपुर, कैंट, ऋषिकेश, रायपुर, राजपुर रोड और मसूरी में हजारों मतदाताओं के नाम सूची से कम हुए हैं। धर्मपुर सीट पर ही करीब 57,318 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इनमें से करीब 10 ऐसी विधानसभा सीटें हैं जहां पिछले चुनाव में जीत या हार का अंतर (margin) जितना था, उससे भी ज्यादा संख्या में मतदाता इस बार सूची से गायब हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हरिद्वार और तराई-भाबर की उन सीटों पर भी बड़ी संख्या में नाम कम हुए हैं जहां मुस्लिम और दलित आबादी का पारंपरिक प्रभाव माना जाता है, हालांकि किसी विशेष वर्ग या दल के समर्थकों के नाम हटने का आधिकारिक आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है।
हालांकि, मुख्य निर्वाचन अधिकारी वीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम कटने का अर्थ यह नहीं है कि प्रक्रिया पूरी तरह बंद हो गई है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के नाम कटे हैं, वे अभी भी ECI-Net ऐप या अपने ब्लॉक इलेक्ट्रॉनिक ऑफिसर (BLO) के माध्यम से फॉर्म-6 भरकर अपना नाम पुनः जोड़ सकते हैं। ड्राफ्ट मतदाता सूची के बाद दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया में अब तक करीब 25 हजार नए मतदाता जुड़ चुके हैं। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, नामांकन की आखिरी तारीख तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी। विशेष रूप से, नामांकन की अंतिम तारीख से 10 दिन पहले तक फॉर्म-6 के जरिए नाम शामिल कराने का प्रावधान है। एक बार नामांकन की अंतिम तारीख गुजर जाने के बाद मतदाता सूची फ्रीज हो जाती है, जिसके बाद न कोई नया नाम जोड़ा जा सकता है और न ही किसी का नाम हटाया जा सकता है।
उत्तराखंड की राजनीति में असली तस्वीर तभी स्पष्ट होगी जब विधानसभा क्षेत्रवार और बूथवार आंकड़ों की गहन जांच की जाएगी। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कुल वोटों में लगभग 3.45 लाख का अंतर रहा था, ऐसे में नई सूची में आई यह बड़ी कमी चुनावी गणित को लेकर चर्चाओं को और भड़का रही है। हालांकि, विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SIR के बाद बदली मतदाता सूची को सीधे किसी एक राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में ली जाने से पहले बूथ स्तर पर नामों की जांच और नाम जोड़ने की प्रक्रिया का इंतजार करना ज़रूरी है। अब देखना यह है कि चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की सक्रियता और पात्र मतदाताओं के पुनर्दर्जनों से इस चुनावी समीकरण को कितना बदलाव हुआ।
