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उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद आज राज्य की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने जा रही है। परंतु केंद्रीय चुनाव आयोग (EC) के नवीनतम निर्देश ने इस प्रक्रिया को फिर से जाँच के दायरे में ला दिया है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दलों ने पहले से ही SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए थे, और अब EC के कदम से यह मुद्दा और भी जटिल हो गया है।
EC ने घोषणा की है कि जिन मतदाताओं के नाम प्री‑SIR चरण में हटाए गए थे, उनकी फिर से जाँच की जाएगी। इस प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर‑घर जाकर पात्र मतदाताओं की स्थिति की पुष्टि करेंगे। जिनको पात्र पाया जाएगा, उनके नाम फिर से मतदाता सूची में शामिल कर दिए जाएंगे। साथ ही 2003 की मतदाता सूची के आधार पर जारी किये गये नोटिसों का भी निस्तारण किया जाएगा, ताकि उन मतदाताओं के दस्तावेज़ या नाम पर उठी आपत्तियों को एक बार फिर से सुलझाया जा सके।
यह कदम उसी समय आया है जब चुनाव आयोग ने कुछ ही दिन पहले फॉर्म‑6 में शामिल अतिरिक्त जानकारियों के कारण हुए विवादों के बीच उसमें बदलाव किया था। फॉर्म‑6 में बदलाव के बाद विपक्ष और विभिन्न संगठनों ने आपत्ति जताई थी, और अब हटाए गए नामों की पुनः जाँच और पात्र लोगों को सूची में पुनः शामिल करने की घोषणा ने उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
SIR के दौरान उत्तराखंड में लगभग 8 लाख मतदाताओं के नाम ASD (अशिक्षित/सामाजिक रूप से पिछड़े) श्रेणी में स्थानांतरित होने का दावा विपक्ष कर रहा है। इस बड़े पैमाने पर नाम हटाने की वजह पर अलग‑अलग दावे सामने आ रहे हैं, और EC के नए निर्देश के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आज प्रकाशित होने वाली सूची को किस अर्थ में अंतिम माना जाएगा।
सारांशतः, EC के निर्देश के तहत हटाए गए नामों की पुनः जाँच, पात्र मतदाताओं को सूची में पुनः जोड़ना, तथा 2003 की सूची से संबंधित नोटिसों का निस्तारण—ये सभी कदम आज की फाइनल वोटर लिस्ट को और भी जाँच के अधीन रखेंगे। उत्तराखंड के निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर सभी नज़रें टिकी हुई हैं, और यह स्पष्ट है कि इस प्रक्रिया में आगे भी संशोधन की गुंजाइश बनी रहेगी।
**Original Title: ** SIR के बीच उत्तराखंड की फाइनल वोटर लिस्ट पर उठे सवाल, EC के नए निर्देश से बढ़ी हलचल
**Original Content: ** उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद आज अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने जा रही है। इससे पहले केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से सामने आए नए निर्देश ने राज्य की फाइनल वोटर लिस्ट को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। विपक्ष पहले से ही SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाता रहा है।
SIR के बीच उत्तराखंड की फाइनल वोटर लिस्ट पर उठे सवाल
केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से अब ऐसे मतदाताओं के नाम दोबारा जांचने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है, जिनके नाम प्री-SIR प्रक्रिया में हटाए गए थे। इसके तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर पात्र मतदाताओं की स्थिति की जांच करेंगे। पात्र पाए जाने वाले मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे। इसके साथ ही वर्ष 2003 की मतदाता सूची के आधार पर जारी किए गए नोटिसों का भी निस्तारण किए जाने की बात कही गई है। यानी जिन मतदाताओं के नाम या दस्तावेजों को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं, उनकी दोबारा प्रक्रिया के तहत जांच की जाएगी।
पहले फॉर्म-6 को लेकर बदला गया था फैसला
बताते चलें यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ दिन पहले ही चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में शामिल कुछ अतिरिक्त जानकारियों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उसमें बदलाव किया था। इन प्रावधानों को लेकर विपक्ष और विभिन्न संगठनों ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद अब हटाए गए नामों की दोबारा जांच और पात्र लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया की घोषणा ने उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
उत्तराखंड में कितने नाम हटे, इस पर भी सवाल
SIR की प्रक्रिया के दौरान उत्तराखंड में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। विपक्षी दलों की ओर से दावा किया गया है कि प्री-SIR प्रक्रिया में करीब 8 लाख मतदाताओं के नाम ASD श्रेणी में चले गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में नोटिस भी जारी किए गए।
हालांकि, इन आंकड़ों और नाम हटाए जाने की वजह को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। ऐसे में अब केंद्रीय चुनाव आयोग के नए निर्देश के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आज प्रकाशित होने वाली सूची को किस अर्थ में अंतिम माना जाएगा।
क्या फिर शुरू होगी नाम जोड़ने की प्रक्रिया?
केंद्रीय चुनाव आयोग के नए निर्देश के मुताबिक हटाए गए नामों की दोबारा घर-घर जाकर जांच और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया होगी। ऐसे में उत्तराखंड में आज जारी होने वाली मतदाता सूची को लेकर यह सवाल अहम हो गया है कि क्या आगे भी इसमें संशोधन की गुंजाइश रहेगी। अब निगाहें उत्तराखंड निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर हैं।
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