उत्तरकाशी में अचानक तेज़ बर्फबारी ने गोमुख‑तपोवन ट्रेक को एक आपदा में बदल दिया, परंतु गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान और वन विभाग की तेज़ कार्रवाई ने 121 ट्रेकर्स को सुरक्षित बचा लिया। शनिवार दोपहर से शुरू हुई लगातार बर्फबारी ने ट्रैक के कई हिस्सों को असुरक्षित बना दिया, जिससे कैंपिंग कर रहे यात्रियों की वापसी लगभग असंभव हो गई। स्थिति की सूचना मिलने पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कनखू बैरियर के प्रभारी वन दारोगा राजवीर रावत ने रविवार को ही रेस्क्यू मिशन शुरू किया। हिमस्खलन के संभावित खतरे को देखते हुए टीम ने सावधानीपूर्वक आगे बढ़ते हुए सभी 121 ट्रेकर्स को गोमुख‑तपोवन से बाहर निकाला और उन्हें गंगोत्री धाम तक पहुंचाया, जहाँ से वे अपने मूल गंतव्य की ओर रवाना हुए।
इसी बीच, उत्तरकाशी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे 136 पर्वतारोहियों के लिए भी एक व्यापक बचाव योजना लागू की गई। इनमें हाई अल्टीट्यूड एक्सपीडिशन के 89 सदस्य, कालिंदी पास बेस कैंप के 18 ट्रेकर्स और ऑडेन कोल पास बेस कैंप के 29 सदस्य शामिल हैं। हर्षिल से तीन हेलीकॉप्टरों को तैनात कर रेस्क्यू ऑपरेशन तेज़ किया गया, और अब तक 21 यात्रियों को सुरक्षित हर्षिल लाया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि मौसम और ट्रेक की स्थिति को निरन्तर मॉनिटर करते हुए बचाव कार्य जारी रहेगा।
बाढ़ और बर्फीले मौसम के कारण दो दिनों तक रोक दी गई चारधाम यात्रा को सोमवार, 28 सितंबर को फिर से शुरू किया गया। ऋषिकेश से प्राप्त निर्देशों के बाद जिलाधिकारी प्रशांत आर्या ने मौसम साफ़ होते ही प्रतिबंध हटाया, और यमुनोत्री हाईवे पर श्रद्धालुओं के वाहन फिर से चलने लगे। प्रशासन ने पुलिस और तहसील अधिकारियों को यात्रा व्यवस्था सुचारु रखने, यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर विशेष ध्यान देने के लिए निर्देशित किया है। साथ ही, मौसम एवं मार्ग की स्थिति पर निरन्तर नजर रखने और सभी विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने की भी हिदायत दी गई।
इन सभी कदमों से यह स्पष्ट होता है कि कठिन हिमालयी परिस्थितियों में भी भारतीय प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र ने समय पर और प्रभावी उपाय अपनाकर जीवन रक्षा को प्राथमिकता दी है। जैसे ही मौसम सुधरता रहेगा, चारधाम यात्रा और ट्रेकिंग गतिविधियों में सामान्यता लौटेगी, परंतु उच्च ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और बरसात के संभावित प्रभाव को देखते हुए सतर्कता जारी रहेगी।
Original Title: गोमुख-तपोवन में फंसे 121 ट्रेकर्स सुरक्षित निकाले गए, 136 पर्वतारोहियों के लिए हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू शुरू,चारधाम यात्रा भी शुरू
Original Content: Gomukh Trek Rescue | Uttarkashi | Char Dham Yatra : उत्तरकाशी में मौसम खराब होने के बाद गोमुख-तपोवन ट्रेक पर फंसे 121 ट्रेकर्स को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। गंगोत्री नेशनल पार्क और वन विभाग की टीम ने मुश्किल हालात के बीच अभियान चलाकर सभी ट्रेकर्स को सुरक्षित गंगोत्री धाम पहुंचाया। इसके बाद सभी को उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया।
बताया गया कि पिछले दो-तीन दिनों में 121 लोग गोमुख और तपोवन क्षेत्र में ट्रेकिंग और कैंपिंग के लिए गए थे। शनिवार दोपहर बाद अचानक क्षेत्र में भारी बर्फबारी शुरू हो गई। लगातार बर्फबारी के कारण ट्रेक के कई हिस्सों में आवाजाही मुश्किल हो गई और ट्रेकर्स की सुरक्षित वापसी चुनौती बन गई।
मामले की जानकारी मिलने के बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश पर वन विभाग की टीम ने रविवार को रेस्क्यू अभियान शुरू किया। कनखू बैरियर के प्रभारी वन दारोगा राजवीर रावत के मुताबिक लगातार बर्फबारी के साथ ट्रेक के कई हिस्सों में हिमस्खलन का खतरा भी बना हुआ था।
इसके बावजूद वन विभाग की टीम ने सावधानी के साथ अभियान चलाया। टीम ने गोमुख और तपोवन क्षेत्र में मौजूद सभी 121 ट्रेकर्स को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें गंगोत्री पहुंचाया।
रेस्क्यू अभियान के दौरान मौसम और ट्रेक की स्थिति को देखते हुए टीम ने विशेष सतर्कता बरती।
उत्तरकाशी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे 136 ट्रेकर्स के लिए भी रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया है। इनमें हाई अल्टीट्यूड एक्सपीडिशन के 89 सदस्य, कालिंदी पास बेस कैंप में हाई अल्टीट्यूड ट्रेकिंग के 18 सदस्य और ऑडन कोल पास बेस कैंप में 29 सदस्य शामिल हैं।
इन लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हर्षिल में तीन हेलीकॉप्टरों ने उड़ान भरी और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 21 ट्रेकर्स को रेस्क्यू कर हर्षिल लाया जा चुका है।
खराब मौसम के कारण पिछले दो दिनों से रोकी गई चारधाम यात्रा भी सोमवार को मौसम साफ होने के बाद दोबारा शुरू कर दी गई। बारिश थमने के बाद यमुनोत्री हाईवे पर श्रद्धालुओं से भरे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई।
चारधाम यात्रा नियंत्रण संगठन, ऋषिकेश से मिले निर्देशों के बाद प्रतिकूल मौसम को देखते हुए यात्रा पर रोक लगाई गई थी। सोमवार 28 सितंबर को मौसम अनुकूल होने पर जिलाधिकारी प्रशांत आर्या के निर्देश पर यह रोक हटा दी गई।
इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए चारधाम यात्रा फिर से शुरू कर दी गई है।
यात्रा शुरू होने के बाद प्रशासन ने पुलिस और तहसील प्रशासन को यात्रा व्यवस्था सुचारु रखने के निर्देश दिए हैं। संबंधित विभागों और यात्रा नोडल अधिकारियों को यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं का ध्यान रखने के लिए सतर्क रहने को कहा गया है।
अधिकारियों को मौसम और यात्रा मार्ग की स्थिति पर लगातार नजर रखने के साथ आपसी समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम साफ होने के बाद यमुनोत्री हाईवे समेत यात्रा मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सामान्य होने लगी है। हालांकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश का असर देखते हुए प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा को लेकर निगरानी बनाए हुए है।
गोमुख-तपोवन से 121 ट्रेकर्स को सुरक्षित निकाल लिया गया है…जबकि अन्य उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे 136 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है।
