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सीएम धामी ने SC‑ST अत्याचार मामलों के त्वरित निपटारे और डिजिटल निगरानी के लिए कठोर कदमों की घोषणा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को राज्य के सचिवालय में आयोजित एक विशेष बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति को सख्त दिशा‑निर्देश जारी किए। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि समिति केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहे; अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक पीड़ित को समय पर न्याय, सुरक्षा, सम्मान और उसका कानूनी अधिकार सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।

बैठक के दौरान धामी ने 2024 से अब तक दर्ज मामलों की विस्तृत समीक्षा का आदेश दिया। 2024 में 189, 2025 में 157 और 15 सितंबर 2026 तक 116 मामलों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिनमें से 25 प्रकरण अभी भी विवेचनाधीन हैं। उन्होंने मामलों में देरी के मूल कारणों की जाँच कर, प्राथमिकता के आधार पर समय‑बद्ध निपटारे के लिए पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग के बीच सुदृढ़ समन्वय की मांग की। विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा, विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता और प्रत्येक निर्णय के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी‑संपन्न समय‑सीमा तय करने के निर्देश भी जारी किए।

पीड़ितों को आर्थिक राहत में किसी भी प्रकार की देरी न हो, इसपर भी विशेष ध्यान दिया गया। 2024‑25 वित्तीय वर्ष में 205 पीड़ितों को कुल 2.2871 करोड़ रुपये, 2025‑26 में 127 पीड़ितों को 1.4316 करोड़ रुपये और 2026‑27 में 18 सितंबर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता दी गई। धामी ने कहा कि राहत केवल नकद तक सीमित नहीं रहनी चाहिए; चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ाव को भी सुदृढ़ किया जाना चाहिए। बच्चों की पढ़ाई पर असर न पड़े, इसके लिए छात्रवृत्ति एवं शैक्षिक योजनाओं का लाभ तुरंत उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया।

डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम की स्थापना को भी आज के एजेंडा में रखा गया। इस प्रणाली के माध्यम से अधिनियम के प्रावधानों, केस‑विवेचना, न्यायालयीन प्रगति और राहत वितरण की राज्य‑स्तर की निगरानी संभव होगी। साथ ही, पुलिस और विभागीय कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में जागरूकता अभियानों और उन जिलों की विशेष समीक्षा करने का निर्देश दिया गया, जहाँ केस‑निपटारा या राहत वितरण में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।

इन सभी कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पीड़ित को न्याय और सहायता के लिए अनावश्यक यात्रा न करनी पड़े, और उत्तराखंड में SC‑ST अत्याचार निवारण अधिनियम का सख्त एवं पारदर्शी कार्यान्वयन हो सके।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।