उत्तराखंड की राजनीति में रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट का खास महत्व है। यह सीट गढ़वाल संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है और राज्य गठन के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) के बीच सीधे मुकाबले का गवाह रही है। पिछले एक दशक से इस सीट की सियासत भरत सिंह चौधरी के नाम से जुड़ी हुई है। उन्होंने 2017 में पहली बार भाजपा के सिंबल पर जीत दर्ज की और 2022 में न केवल अपनी सीट बचाई, बल्कि वर्तमान में पुष्कर सिंह धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनकर अपनी राजनीतिक हैसियत को और मजबूत किया।
आगामी विधानसभा चुनाव में भरत सिंह चौधरी के सामने कई चुनौतियाँ हैं। लगातार दो बार विधायक रहने से उपजने वाली एंटी-इनकम्बेंसी और जनता की बढ़ती उम्मीदें उनकी जमीन खिसका सकती हैं। इसके अलावा, उनके बयानों से झलकने वाली ऐरोगैंस भी एक बड़ा मुद्दा बन सकती है। देश और प्रदेश के सियासी हालात, जेन जी आंदोलन और दलित सम्मान का मुद्दा भी रुद्रप्रयाग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
रुद्रप्रयाग विधानसभा क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना मुख्य रूप से सवर्ण बहुल है। यहाँ राजपूत और ब्राह्मण मतदाताओं का वर्चस्व है, जो किसी भी प्रत्याशी की जीत या हार की पटकथा लिखता है। भरत सिंह चौधरी स्वयं ठाकुर समुदाय से आते हैं और उनके पास इस वर्ग में मजबूत पैठ है। लेकिन इस वोट बैंक को एकजुट रखना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। ब्राह्मण मतदाता, जो करीब 30 से 35 फीसद हैं, हवा का रुख मोड़ने की क्षमता रखते हैं।
रुद्रप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में 15 से 16 फीसद अनुसूचित जाति मतदाता हैं, जो हार-जीत के अंतर को तय करने में ‘साइलेंट फैक्टर’ की भूमिका निभाते हैं। स्थानीय मुद्दे, जैसे कि केदारनाथ यात्रा प्रबंधन, स्थानीय व्यापारियों के हित, और युवाओं के लिए स्वरोजगार, भी जनता का सियासी मिजाज प्रभावित करते हैं। भरत सिंह चौधरी के मंत्री बनने के बाद जनता उनसे यात्रा मार्ग के सुदृढ़ीकरण और एमएसएमई व खादी-ग्रामोद्योग के माध्यम से नए रोजगार सृजन की उम्मीद लगाए बैठी है।
रुद्रप्रयाग में टिकटों की होड़ और दावेदारी का खेल दोनों प्रमुख दलों में दिलचस्प मोड़ पर है। भाजपा में भरत चौधरी वर्तमान में कैबिनेट मंत्री होने के साथ-साथ दो बार के सफल विधायक होने के नाते भाजपा के सबसे स्वाभाविक और प्रबल दावेदार हैं। लेकिन भाजपा का पुराना कैडर और भाजपा के कुछ स्थानीय युवा, संघ पृष्ठभूमि के नेता अंदरखाने अपनी जमीन तलाश रहे हैं और चौधरी को चुनौती दे सकते हैं। कांग्रेस में 2022 के चुनाव में उपविजेता रहे प्रदीप थपलियाल लगातार क्षेत्र में जनमुद्दों को लेकर सक्रिय हैं और कांग्रेस से मुख्य दावेदार माने जा रहे हैं।
रुद्रप्रयाग की जनता का मिजाज भांपना आसान नहीं रहा है, लेकिन कुछ समय पहले भरत सिंह चौधरी के जनता को लताड़ लगाते कुछ वीडियो खूब वायरल हुए थे। उनका अब क्या असर है, यह वक्त बताएगा। भरत सिंह चौधरी को जहां सरकार के संसाधनों और अपने 10 साल के कार्यों का सहारा है, वहीं लेकिन अगर भरत चौधरी अपनी विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने और जातिगत समीकरणों को अपने पक्ष में बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो रुद्रप्रयाग में भाजपा के गढ़ को भेदना विपक्ष के लिए एक कठिन चुनौती साबित होगा।
