उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी प्रमुख पदों से इस्तीफा देने का प्रस्ताव रख कर राज्य की राजनीति को हिला दिया है। रावत ने सोशल मीडिया पर लंबी चिट्ठी में बताया कि वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हट रहे हैं, क्योंकि वह नहीं चाहते कि उनके या उनके पूर्व सहयोगियों से जुड़ी कोई घटना कांग्रेस के भ्रष्टाचार‑विरोधी संघर्ष को कमजोर करे। इस कदम ने दिल्ली में बैठी कांग्रेस आलाकमान की नींद उड़ा दी, जहाँ पार्टी के भीतर रावत के भविष्य को लेकर पहले से ही गहरी उलझन व्याप्त थी।
इसी बीच, आयकर विभाग (ED) ने रावत के पूर्व ओएसडी और वर्तमान पीए चंदन सिंह जीना के घर में बड़े पैमाने पर छापेमारी की। 2016 के यूकेएसएसएससी वीपीडीओ परीक्षा‑स्कैंडल से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जाँच के हिस्से के रूप में यह कार्रवाई हुई। छानबीन में 28 करोड़ रुपये की संपत्ति, भारी मात्रा में नकद, सोने के सिक्के, बेशकीमती लग्जरी घड़ियां, कई महंगे मोबाइल और गहने बरामद हुए। यह खबर मीडिया में आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई, जिससे रावत ने तुरंत अपना इस्तीफा प्रस्तुत किया।
रावत ने अपने पोस्ट में कहा कि “एक विशेष नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है” और यह स्पष्ट किया कि वह किसी भी सरकारी पद पर नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके पूर्व ओएसडी ने ग्राम सेवकों की भर्ती या ओएमआर शीट में छेड़छाड़ जैसी कोई कृत्य किया है और उसके पुख्ता प्रमाण हैं, तो वह इस कृत्य के लिए “बहुत लज्जित” हैं, परन्तु इन आरोपों पर उनका “रत्ती भर भी विश्वास नहीं” है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को “राजनीतिक साजिश” करार दिया, क्योंकि 2017 में सत्ता से विदाई और 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद रावत के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं रही थीं।
वर्ष 2016 की वह स्टिंग ऑपरेशन, जिसने रावत की सरकार को गिरा दिया था, आज फिर से याद दिला रहा है कि उत्तराखंड की राजनीति में किस तरह के वीडियो और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से सरकारें उखड़ सकती हैं। मार्च‑मई 2016 में बागी विधायकों को 25‑30 लाख रुपये तक की रक़म देने की खुली चर्चा वाले वीडियो ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश और हाईकोर्ट‑सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप को जन्म दिया, जिसके बाद रावत की सरकार ढह गई। अब, उसी तरह के राजनीतिक तूफान के बीच, रावत का इस्तीफा और ED की कार्रवाई कांग्रेस के भविष्य को तय करने वाले सबसे बड़े मोड़ बन सकते हैं।
Original Title: जब गिर गई थी हरीश रावत की सरकार!, एक स्टिंग ने पहले किया था तख्तापलट
Original Content: हरीश रावत के साथ ही कांग्रेस भी इस वक्त भारी व्याकुलता में हैं। वजह ED का वो चाबुक, जो उनके पूर्व ओएसडी के ठिकाने पर पड़ा है। लेकिन उसकी चोट सीधे हरीश रावत की राजनीति पर जाकर लग गई है। साल 2016 में जिस तरह एक स्टिंग ऑपरेशन ने हरीश रावत से सत्ता छीन ली थी। ठीक उसी तरह चुनाव से पहले उनके पूर्व ओएसडी के ठिकाने पर पड़ी ये रेड क्या हरीश रावत के साथ ही कांग्रेस का भविष्य तय करने जा रही है। … (remaining original text omitted for brevity)
