उत्तराखंड की ‘भुली’ पहल: 5,000 महिलाओं ने की रिकॉड पंजीकरण, IIM काशीपुर के साथ मिलकर बदलेंगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संतुलन

धामी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘भुली’ (Bhuli) के तहत उत्तराखंड इतिहास में उस पहली बार का गौरव हासिल कर रहा है जब यह राज्य उत्तर भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने ग्रामीण उद्यम इन्क्यूबेशन कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की उद्यमिता को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है, और शुरुआती प्रतिक्रिया इस दिशा में सकारात्मक सिद्ध हुई है। महज कुछ ही महीनों के भीतर, इस योजना के आधिकारिक एमआईएस पोर्टल पर 5,000 से अधिक महिला उद्यमियों ने अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा लिया है। यह आंकड़ा न केवल राज्य की ग्रामीण महिलाओं में आत्मनिर्भरता और व्यावसायिक उन्नति के प्रति बढ़ते उत्साह का प्रमाण है, बल्कि यह दर्शाता है कि महिलाएं अपनी स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक ले जाने के लिए तत्पर हैं।

योजना का शिलान्यास 14 जुलाई को देहरादून में ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी द्वारा किया गया था, जहां उन्होंने ‘भुली’ के एमआईएस पोर्टल और सूचना पुस्तिका का विमोचन भी किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत संचालित इस कार्यक्रम को व्यावहारिक और व्यावसायिक रूप देने के लिए उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (USRLM) ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) काशीपुर के ‘फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट’ (FIED) के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की है। इस तकनीकी सहयोग के तहत, विकासोन्मुखी महिला उद्यमियों को विशेषज्ञ परामर्श, व्यापारिक प्रशिक्षण और हैंडहोल्डिंग सहायता प्रदान की जाएगी। विशेषज्ञों द्वारा उत्पादों की गुणवत्ता और शेल्फ-लाइफ बढ़ाने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाएगा, जबकि आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए स्थानीय उत्पादों को बाजार-योग्य बनाया जाएगा। इसके अलावा, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुचाने की सुविधा भी दी जाएगी।

वित्तीय सहायता के संदर्भ में, ‘भुली’ कार्यक्रम के पहले चरण में 150 से अधिक योग्य महिला उद्यमियों का चयन किया जाएगा ताकि उनका व्यवसाय विस्तार कर सके। इसमें से 18 उत्कृष्ट महिला उद्यमियों को, जिन्होंने विभिन्न श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया होगा, प्रति उद्यमी अधिकतम 15 लाख रुपये तक की अनुदान राशि (ग्रांट) प्रदान की जाएगी। चयनित अन्य उद्यमियों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए औसतन 4 लाख रुपये तक की ब्याजमुक्त ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जो महिलाएं प्रमुख चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाती हैं, उन्हें भी कौशल विकास प्रशिक्षण और व्यावसायिक मार्गदर्शन से जोड़ा जाएगा, जिससे उनका संपूर्ण कारोबारी ज्ञान बढ़ेगा।

इस 18 महीने की अवधि वाले इन्क्यूबेशन कार्यक्रम का मूल लक्ष्य केवल ग्रामीण उद्यमों को जीवित रखना नहीं, बल्कि उन्हें व्यावसायिक रूप से टिकाऊ और लाभदायक बनाना है। गहन प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग के माध्यम से, 18 महीनों के भीतर चयनित महिला उद्यमियों के कुल लाभ में न्यूनतम 15 से 20 प्रतिशत तक की प्रत्यक्ष वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने इस योजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तराखंड में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिलाएं बेहतरीन उत्पाद तैयार कर रही हैं, लेकिन अक्सर ये स्थानीय मेलों तक ही सीमित रह जाते थे। ‘भुली’ कार्यक्रम इन उत्पादों को ब्रांडिंग और डिजिटल विपणन के जरिए बड़े व्यावसायिक बाजारों से जोड़ेगा, जिससे न केवल महिलाएं वित्तीय रूप से स्वतंत्र होंगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।