उत्तराखंड की सड़कें: 25 साल में कितना बदला सफर, कितना बाकी है सपना?

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उत्तराखंड को बने 25 साल पूरे होने को हैं। इन सालों में राज्य की सड़कों की तस्वीर काफी हद तक बदली है। कभी पहाड़ों तक सीमित रही सड़क व्यवस्था अब गांव-गांव तक पहुंचने लगी है। लेकिन सवाल अब भी कायम है क्या हर गांव तक सड़क पहुंच पाई, या ये सफर अभी अधूरा है?

36,000 किलोमीटर से अधिक हुई सड़कों की लंबाई

साल 2000 में जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था, तब यहां सड़कों की कुल लंबाई सिर्फ 24,412 किलोमीटर थी। आज यह आंकड़ा बढ़कर 36,000 किलोमीटर से अधिक हो गया है। इस बदलाव में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY), चारधाम महामार्ग परियोजना और भारतमाला योजना जैसी योजनाओं ने अहम भूमिका निभाई है।

21,316 किलोमीटर सड़कों का हुआ निर्माण

राज्य बनने के एक महीने बाद दिसंबर 2000 में PMGSY के तहत 1,864 गांवों का चयन किया गया था। यह चयन 2001 की जनगणना के आधार पर किया गया था और इनमें वे गांव शामिल थे जिनकी आबादी 250 से अधिक थी। तब से अब तक इन गांवों के लिए 21,316 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है, जिस पर लगभग 11,134 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

योजना का चौथा चरण शुरू

अब योजना का चौथा चरण शुरू हो चुका है। इस बार 2011 की जनगणना के आधार पर 1,490 गांवों को शामिल किया गया है। जहां भौगोलिक सीमाओं के कारण सड़क बनाना मुश्किल है, वहां क्लस्टर मॉडल के तहत सड़क पहुंचाने का काम किया जा रहा है। फिर भी आज भी उत्तराखंड में 407 ऐसे गांव हैं जिनकी आबादी 150 से 249 के बीच है, और 1,796 गांव जिनकी आबादी 150 से कम है।

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बता दें ये PMGSY के मानकों में नहीं आते। यही अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके साथ ही, राज्य की कई सड़कों को बरसात और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों से भारी नुकसान झेलना पड़ता है। अब सवाल यह है कि 25 साल के इस सफर में उत्तराखंड की सड़कें कितनी बदलीं और कितना रास्ता अभी बाकी है?

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