उत्तराखण्ड के उत्तराखाँती जिले में स्थित केदारताल ट्रैक पर 29 अक्टूबर को अचानक गिरा हिमस्खलन और तीव्र बर्फबारी ने आठ यात्रियों को अकल्पनीय खतरे में डाल दिया। 27 अक्टूबर को गंगोत्री से 13‑सदस्यीय दल, जिसमें पश्चिम बंगाल व उत्तर प्रदेश के सात ट्रैकर, स्थानीय गाइड सिद्धार्थ राणा और पाँच सपोर्ट स्टाफ़ शामिल थे, ने केदारताल की ओर यात्रा शुरू की थी और 30 अक्टूबर तक लौटने का कार्यक्रम था। वापसी के दौरान भोजखड़क‑कच्ची ढांग के पास हिमस्खलन ने समूह को घेर लिया, जिससे पाँच सदस्य सुरक्षित बचकर लौट आए जबकि शेष तीन सदस्य और दो गाइड तुरंत लुप्त हो गए। अगली सुबह चार सदस्य गंगोत्री पहुँचे और स्थानीय प्रशासन को सूचना दी, जिससे 31 अक्टूबर से बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू हुआ।
संकट के बाद उत्तराखण्ड पुलिस, वन विभाग, भारतीय सीमा सुरक्षा बल (ITBP), नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) तथा राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने मिलकर सर्च‑ऑपरेशन चलाया। 8:45 बजे सुबह SDRF की टीम ने खोज कार्य प्रारम्भ किया, जिसमें NDRF‑SDRF के प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड भी शामिल थे। कठिन पहाड़ी भूभाग और निरंतर बर्फबारी के कारण हेलीकॉप्टर, सैटेलाइट फोन और आधुनिक नेविगेशन उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है, परन्तु कम दृश्यता बचाव कार्य को और कठिन बना रही है।
अभी तक छह शहीदों के शव बरामद हो चुके हैं। इनमें लखनऊ के गायत्रीपुरम निवासी वर्तिका वर्मा (28) व उसकी बहन दीपिका वर्मा (29) के साथ‑साथ पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के पाँच युवक – तापस बाउरी (30), रतन घोष (23), मनोज खोवास (39), रिंटू मंडल (40) और उदय घोष (30) – भी शामिल हैं। वर्तिका वर्मा के भाई अतुल ने ट्रैकिंग एजेंसियों पर समय पर सूचना न देने और लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि रतन के पिता ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को यात्रा से रोकने की कोशिश की थी।
स्थानीय गाइड सिद्धार्थ राणा के पिता मोहन राणा ने भी तेज़ी से खोज कार्य की माँग की। उन्होंने जिलाधिकारी प्रशांत कुमार आर्य से मुलाकात कर सेना व वायुसेना के आधुनिक हेलीकॉप्टरों की सहायता लेने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि दुर्गम भू‑प्रकृति व खराब मौसम को देखते हुए बड़े स्तर पर बचाव अभियान अनिवार्य है।
आज तक दो यात्रियों के शव अभी भी नहीं मिले हैं। सभी बचाव एजेंसियां, डॉग स्क्वॉड और एयरो‑मेडिकल टीमें मिलकर निरंतर खोज जारी रखी हैं, ताकि कठिन मौसम और कठिन भू‑परिस्थितियों के बीच इन दो लापता यात्रियों को शीघ्रतम समय में बचाया जा सके।
Original Title: केदारताल ट्रैक हादसा: अब तक 6 लोगों के शव मिले, 2 की तलाश जारी
Original Content: Uttarkashi | Kedartal Trek | Avalanche Rescue : उत्तराखंड के केदारताल ट्रैक पर हुए हिमस्खलन और भारी बर्फबारी ने आठ लोगों की जान खतरे में डाल दी। 29 अक्टूबर को हुए इस हादसे के बाद से जारी रेस्क्यू अभियान में अब तक छह लापता लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं दो लोग अभी भी लापता हैं। उनकी तलाश के लिए बचाव दल लगातार दुर्गम पहाड़ी इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
गुरुवार को बरामद किए गए दो शवों को नीचे लाया गया। बाकी दो लापता लोगों का पता लगाने के लिए अभियान जारी है। तलाशी को और प्रभावी बनाने के लिए NDRF और SDRF की डॉग स्क्वायड टीमों को भी लगाया गया है।
जानकारी के मुताबिक, 27 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के सात ट्रैकर, उत्तरकाशी के स्थानीय गाइड सिद्धार्थ राणा और पांच सपोर्ट स्टाफ समेत कुल 13 लोगों का दल गंगोत्री से केदारताल ट्रैक के लिए रवाना हुआ था। दल को 29 अक्टूबर तक वापस लौटना था।
वापसी के दौरान भोजखड़क और कच्ची ढांग के पास अचानक हिमस्खलन और बर्फबारी हुई। इसकी चपेट में आने से आठ सदस्य लापता हो गए….जबकि पांच लोग सुरक्षित बचकर लौट आए। 30 अक्टूबर को दल के चार सदस्य गंगोत्री पहुंचे और प्रशासन को घटना की जानकारी दी। इसके बाद 31 अक्टूबर से रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया।
हादसे के बाद से SDRF, NDRF, ITBP, उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) की टीमें संयुक्त रूप से तलाश अभियान चला रही हैं। गुरुवार सुबह 8:85 बजे SDRF की टीम सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना हुई। अभियान में NDRF और SDRF के विशेष प्रशिक्षित डॉग स्क्वायड भी शामिल किए गए हैं।
दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर की मदद से भी तलाश की जा रही है। हालांकि लगातार बर्फबारी और कम दृश्यता के कारण बचाव दलों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सैटेलाइट फोन के जरिए अभियान में जुटे जवानों की सुरक्षा की जानकारी भी मिली है।
इस हादसे में लखनऊ के गायत्रीपुरम निवासी वर्तिका वर्मा (28) और उनकी बहन दीपिका वर्मा (29) के शव भी बरामद किए गए हैं। दोनों को ट्रैकिंग का काफी शौक था और वे उत्तराखंड व नेपाल के कई कठिन ट्रैक पूरे कर चुकी थीं। करीब दो महीने पहले ही दोनों फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौटी थीं।
दोनों बहनों के शव मिलने के बाद उनके परिजन उत्तरकाशी पहुंचे। उनके भाई अतुल वर्मा ने ट्रैकिंग एजेंसी पर घटना की जानकारी समय पर नहीं देने और लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
हादसे का शिकार हुए दल में पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के पांच युवक भी शामिल थे। इनमें तापस बाउरी (30), रतन घोष (23), मनोज खोवास (39), रिंटू मंडल (40) और उदय घोष (30 के नाम बताए गए हैं।
परिजनों के मुताबिक ये सभी दोस्त थे और पहले भी पहाड़ी यात्राओं में रुचि रखते थे। रतन घोष के पिता ने बताया कि उन्होंने बेटे को ट्रैकिंग पर जाने से मना किया था, लेकिन वह यात्रा पर जाने की जिद कर रहा था। वहीं, तापस बाउरी ने घर से निकलने से पहले परिवार को बताया था कि वह ऐसे इलाके में जा रहा है….जहां कुछ दिनों तक फोन पर संपर्क नहीं हो पाएगा।
लापता स्थानीय गाइड सिद्धार्थ राणा के पिता मोहन राणा ने भी प्रशासन से सर्च ऑपरेशन तेज करने की मांग की थी। उन्होंने जिलाधिकारी प्रशांत कुमार आर्य से मुलाकात कर सेना और एयरफोर्स के आधुनिक हेलीकॉप्टरों की मदद लेने का अनुरोध किया
